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कोरियाई प्रायद्वीप मुद्दे को हल करने के लिए रूस, दक्षिण कोरिया मिलकर काम करेंगे

मॉस्को, 23 जून (आईएएनएस)। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष मून जे इन ने कोरिया प्रायद्वीप मुद्दे को हल करने के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, दोनों नेताओं की वार्ता के बाद क्रेमलिन द्वारा जारी संयुक्त बयान के मुताबिक, पुतिन और मून ने शुक्रवार को कोरियाई प्रायद्वीप मुद्दे को सुलझाने और प्रायद्वीप पर शांति व समृिद्ध के लिए एक-दूसरे की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

बयान में कहा गया,दोनों देशों के नेता कोरिया प्रायद्वीप को पूर्ण रूप से परमाणु मुक्त बनाने के मकसद के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने और पूर्वोत्तर एशिया व कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति व स्थिरता को बहाल करने पर सहमत हुए हैं।

पुतिन और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून ने माना कि कोरियाई प्रायद्वीप पर हालात पहले से बेहतर हुए हैं।

पुतिन ने वार्ता के बाद कहा, अंतर कोरियाई संपर्क बहाल हुए हैं। दक्षिण कोरिया व उत्तर कोरिया के नेताओं के बीच हुई बैठकों से प्रोत्साहित करने वाली नतीजे हासिल हुए हैं।

--आईएएनएस

03:59 PM

टस्क ने आव्रजन मुद्दे पर आस्ट्रियाई चांसलर से मुलाकात की

वियना, 23 जून (आईएएनएस)। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष डोनाल्ड टस्क ने प्रवासन नीति पर चर्चा के लिए आस्ट्रिया के चांसलर सेबेस्टियन कर्ज से मुलाकात की।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, आस्ट्रियाई सरकार ने अपने बयान में कहा कि शुक्रवार को हुई चर्चा का विषय प्रवासन नीति रही, जिसके लिए आस्ट्रिया 20 सितंबर को साल्जबर्ग में एक अनौपचारिक यूरोपीय संघ सम्मेलन करेगा।

बयान में कहा गया कि टस्क ने उम्मीद जताई है कि अगले सप्ताह होने वाले यूरोपीय संघ सम्मेलन में शरणार्थी नीति को लेकर समाधान ढूंढ लिया जाएगा।

कर्ज ने अपने बयान में कहा, बाहरी सीमाओं की रक्षा के लिए डोनाल्ड टस्क हमारे साथ काम कर रहे हैं और इसके लिए हम उनके आभारी हैं।

यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष जीन-क्लॉड जंकर रविवार को ब्रसेल्स में प्रवासन पर अनौपचारिक शिखर सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं।

--आईएएनएस

10:41 AM

कोविंद का क्यूबा से विकासशील देशों को सशक्त बनाने का आह्वान

हवाना, 23 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने क्यूबा से विकासशील देशों को सशक्त बनाने का आग्रह किया है, जिससे दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाई जा सके।

समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, कोविंद ने शुक्रवार को इच्छा जताई कि क्यूबा और भारत विकासशील देशों के लिए एक बुलंद आवाज हैं।

कोई भारतीय नेता लगभग छह दशक बाद क्यूबा के दौरे पर रहा।

कोविंद ने हवाना विश्वविद्यालय में छात्रों, नेताओं और राजनयिकों के सामने अपने भाषण में इंडिया एंड ग्लोबल साउथ का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के लिए साझेदारी दोनों देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के केंद्र में रही है।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्यूबा चिकित्सा राहत मिशन और विदेशों में चिकित्सकों की वजह से दुनियाभर के लाखों लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिला है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक क्रम में बेहतर जगह हासिल करने के लिए देशों को मिलकर काम करना चाहिए।

इस संबंध में, उन्होंने ब्यूनस आयर्स में मार्च 201 9 में दक्षिण-दक्षिण सहयोग पर उच्च स्तरीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन आयोजित करने के लिए जून की शुरुआत में लिए गए निर्णय का स्वागत किया।

यह एक ऐतिहासिक क्षण था क्योंकि क्यूबा में 1959 की क्रांति के बाद से किसी भी भारतीय नेता ने द्वीप का दौरा नहीं किया था। इस क्रांति ने फिदेल कास्त्रो को सत्ता में लाने और वर्तमान कम्युनिस्ट प्रणाली की स्थापना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

कोविंद ने यहां जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी (सीआईजीबी) सेंटर का भी दौरा किया और क्यूबा के राष्ट्रीय नायक जोस मार्टिन और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित मूर्तियों को श्रद्धांजलि दी।

--आईएएनएस

10:36 AM

अमेरिका का दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्याभ्यास रद्द

वाशिंगटन, 23 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्याभ्यासों पर अनिश्चितकाल के लिए रद्द कर दिया है।

सिंगापुर में डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुए समझौते के तहत सैन्याभ्यास पर रोक लगाई गई है।

पेंटागन की प्रवक्ता डाना डब्ल्यू.व्हाइट ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, सिंगापुर सम्मेलन बैठक के नतीजों के समर्थन में दक्षिण कोरिया के वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स एन.मैटिस ने कोरियाई प्रायद्वीप पर सैन्याभ्यास को अनिश्चितकालीन तौर पर रद्द कर दिया।

--आईएएनएस

09:33 AM

लीबिया, इटली ने अवैध आव्रजन मुद्दे पर चर्चा की

त्रिपोली, 23 जून (आईएएनएस)। लीबिया के प्रधानमंत्री फेयाज अल सराज ने अवैध आव्रजन को लेकर इटली के प्रधानमंत्री गिउसेपे कोन्टे से फोन पर चर्चा की।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच लीबिया में ताजा राजनीतिक घटनाक्रमों, द्विपक्षीय संबंध और दोनों देशों के बीच सहयोग पर चर्चा हुई।

बयान के मुताबिक, इटली के प्रधानमंत्री ने लीबिया की अंतरिम सरकार के लिए सहयोग जताने की प्रतिबद्धता जताई है।

--आईएएनएस

09:22 AM

जलवायु परिवर्तन से निपटने विकासशील देशों को मदद की दरकार : भारत

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को विकसित देशों को उनकी प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से निपटने के लिए विकासशील देशों को मदद की दरकार है।

जलवायु परिवर्तन के मसले पर ब्रसेल्स में आयोजित यूरोपीय संघ के उच्चस्तरीय कार्यक्रम में सुषमा स्वराज ने कहा कि विकसित देशों की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को मूर्त पहल व परियोजना के रूप में परिवर्तित करने की उनकी क्षमता में अभिरुचि, स्थाई व पर्याप्त वित्त और प्रौद्योगिकी का अभाव रुकावट पैदा करता है।

उन्होंने कहा, पेरिस समझौता या 2030 के एजेंडा को महत्वाकांक्षी व प्रभावी तरीके से हासिल करने के लिए जरूरी संसाधन का पैमान बहुत बड़ा है।

सुषमा स्वराज ने कहा, इन प्रक्रियाओं में वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता है, जोकि इसके लिए प्रस्तावित समाधानों के केंद्र में है।

ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते के तहत जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए विकसित देशों को 2020 से विकासशील देशों की मदद के लिए कम से कम 100 अरब डॉलर की रकम देनी होगी। यह रकम विकासशील देशों को उनके राष्ट्रीय निर्धारित योगदान को पूरा करने के लिए प्रदान करना जरूरी है।

भारत को अपने जलवायु लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2030 तक कम से कम 2,500 अरब डॉलर की रकम की दरकार है। हाल ही में सरकार ने बताया कि उनकी दो परियोजनाओं को 13.44 करोड़ डॉलर विश्व जलवायु कोष (जीसीएफ) से मिला है।

सुषमा स्वराज ने कहा, अगर हमें पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य को हासिल करना है तो धन और प्रौद्योगिकी के लिए दुनिया में एक समान योजना की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, इसके बिना विकासशील देशों को अपने मौजूदा राष्ट्रीय निर्धारित योगदान लक्ष्य को हासिल करने में गंभीर व्यवधान का सामना करना पड़ेगा। उनसे किसी भी प्रकार की आकांक्षा बढ़ाने के लिए उनकी मदद में बढ़ोतरी करनी होगी।

--आईएएनएस

09:48 PM

ममता का चीन दौरा रद्द

कोलकाता, 22 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना आठ दिवसीय चीन दौरा शुक्रवार को रद्द कर दिया, क्योंकि दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत उचित स्तर पर प्रस्तावित राजनीतिक बैठकें तय नहीं हो पाईं।

ममता शुक्रवार शाम चीन के लिए रवाना होने वाली थीं। उन्होंने दौरा रद्द होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन कहा कि उन बैठकों की पुष्टि हुए बगैर उनके चीन दौरे का कोई अर्थ नहीं था।

उन्होंने कहा, कल तक सबकुछ ठीक था, लेकिन दुर्भाग्यवश चीनी पक्ष राजनीतिक मुलाकातों की पुष्टि नहीं कर सका।

ममता ने ट्वीट किया, चीन में हमारे राजदूत ने अब सूचित किया कि आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत उचित स्तर पर राजनीतिक बैठकों की पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत एक शिष्टमंडल के साथ मेरे चीन दौरे का कोई मतलब नहीं रह जाता।

उन्होंने कहा, यद्यपि हमारे राजदूत ने कार्यक्रम को सफल बनाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन भारतीय राजदूत द्वारा चीन को प्रस्तावित राजनीतिक बैठकों की अंतिम समय में पुष्टि नहीं हो पाने के कारण दुर्भाग्यवश हमें दौरा रद्द करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने हालांकि आशा जाहिर की कि इस घटना का दोनों देशों के रिश्ते पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा, मैं कामना करती हूं कि आने वाले दिनों में भारत और चीन की मित्रता जारी रहेगी और दोनों देशों के हितों में यह और मजबूत होगी।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मार्च में बनर्जी से इस दौरे के लिए अनुरोध किया था।

--आईएएनएस

09:15 PM

यूएनएचआरसी प्रमुख ने निष्पक्षता से समझौता किया : प्रसाद

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त जीद राद अल हुसैन ने यूएनएचसीआर की निष्पक्षता और प्रतिष्ठा के साथ समझौता किया है।

प्रसाद ने यह प्रतिक्रिया यूएनएचआरसी द्वारा जारी हालिया रपट के संबंध में पूछे जाने पर दी। इस रपट में कश्मीर और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मानवधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया गया था और इसकी अंतर्राष्ट्रीय जांच की अनुशंसा की गई थी।

उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण रपट है, जोकि पाकिस्तान को जानबूझकर बचाने का प्रयास है। और मुझे यह कहना है कि मानवाधिकार उच्चायुक्त ने गैर-जिम्मेदाराना काम किया है।

प्रसाद ने कहा, संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था की रपट की दुनिया में विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा है। अल हुसैन ने मानवधिकार समूह की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा के मूलभाव के साथ समझौता किया है।

मानवाधिकार उच्चायुक्त के कार्यालय से 14 जून को जारी 49 पन्नों की रपट में नियंत्रण रेखा के दोनों तरफ मानवाधिकार उल्लंघनों का आरोप लगाया गया है।

भारत ने हालांकि इस रपट को खारिज कर दिया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस रपट को असत्यापित सूचना का चुनिंदा संकलन बताया है।

--आईएएनएस

08:27 PM

चाबाहार बंदरगाह 2019 तक पूरा करने को प्रयासरत : गडकरी

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय परिवहन एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि ईरान के चाबाहार बंदरगाह को 2019 तक पूरी तरह से चालू करने की कोशिश में भारत जुटा हुआ है। इसके चालू हो जाने से राष्ट्रमंडल में शामिल स्वतंत्र देशों (सीआईएस) के इलाके में पहुंच ज्यादा सुलभ हो जाएगी।

दो दिवसीय दौरे पर तजाकिस्तान गए गडकरी तजाकिस्तान की राजधानी दुशांबे स्थित भारतीय दूतावास में सांस्कृतिक केंद्र के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे।

चाबाहार बंदरगाह का विकास करने को लेकर 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान ने त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस बंदरगाह का विकास करने का मकसद पाकिस्तान गए बिना तीनों देशों के बीच जलमार्ग की सुविधा उपलब्ध कराना है।

मगर हाल ही में अमेरिका के ईरान के साथ परमाणु करार से अलग हो जाने और ईरान पर दोबार आर्थिक प्रतिबंध लगाने के फैसले के बाद इस परियोजना के समय पर पूरा होने के लक्ष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।

--आईएएनएस

05:52 PM

ट्रंप ने उत्तर कोरियाई परमाणु समझौते को गलत ढंग से पेश किया

वाशिंगटन, 22 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग-उन के साथ अपने समझौते का भ्रामक वर्णन किया है।

सीएनएन के अनुसार, वास्तव में सिंगापुर में 12 जून की शिखर बैठक में किम के साथ हस्ताक्षरित दस्तावेज में कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणुनिरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने के लिए उत्तर कोरिया की पिछली प्रतिबद्धता को दोहराया गया है।

रक्षामंत्री जेम्स मैटिस के बगल में गुरुवार को मंत्रिमंडल कक्ष में बैठकर ट्रंप ने दस्तावेज को पढ़ा, जिसमें लिखा था - हम फौरन उत्तर कोरिया के परमाणुनिरस्त्रीकरण को शुरू करेंगे। यह एक अपारदर्शी वाक्यांश है, जो अमेरिका और उत्तर कोरिया के अलग-अलग दृष्टिकोण को दिखाता है।

दस्तावेज के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने उत्तर कोरिया को सुरक्षा गारंटी प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता जताई और किम जोंग-उन ने कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणुनिरस्त्रीकरण को पूरा करने के लिए अपनी ²ढ़ और अविश्वसनीय प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दस्तावेज में यह भी घोषित किया गया है कि उत्तर कोरिया कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं, बुधवार को मैटिस ने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइलों के लॉन्च के लिए किसी भी बुनियादी ढांचे को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं या पूर्ण परमाणुनिरस्त्रीकरण के लिए कोई अतिरिक्त कदम उठाए हैं।

--आईएएनएस

05:25 PM
 इन्फोसिस ने कारोबार बढ़ाने डिजिटल रणनीति पर दांव लगाया

इन्फोसिस ने कारोबार बढ़ाने डिजिटल रणनीति पर दांव लगाया

बेंगलुरू, 23 जून (आईएएनएस)। सॉफ्टवेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक व अध्यक्ष नंदन एम. नीलेकणि ने शनिवार को कहा कि मौजूदा रोमांचकारी दौर में इन्फोसिस कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल रणनीति पर दांव लगा रही है।

कंपनी की 37वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को नीलेकणि ने बताया, हम अपने उद्योग के सफर के रोमांचकारी मोड़ पर हैं। आज हम साझेदारी करने और अपने ग्राहकों में इजाफा करने की जितनी संभावनाएं देख रहे हैं, उतनी संभावनाएं मैंने पहले कभी नहीं देखी है। डिजिटल क्रांति से हर उद्योग व क्षेत्र में बदलाव आ रहा है और हम उसमें निमग्न होते जा रहे हैं।

नीलेकणि (63) ने 10.94 अरब डॉलर का कारोबार करने वाली प्रमुख आईटी कंपनी इन्फोसिस में आठ साल बाद दोबारा अगस्त 2017 में अपनी नई पारी की शुरुआत की। पूर्व में कंपनी के सीईओ पद से त्यागपत्र देने के बाद वह केंद्र सरकार के संगठन यूआईडीएआई के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाले थे।

बतौर कंपनी अध्यक्ष पहली बार एजीएम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया, मनोरंजन, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाएं, खुदरा और फार्माश्युटिकल हर जगह डिजिटीकरण का क्षेत्र व्यापाक बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा, नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके, इंटरनेट ऑफ थिंग्स का लाभ उठाकर ग्राहक सेवा की नई विधि तैयार करके डिजिटल प्रौद्योगिकी व्यवसाय के नये तरीके पैदा कर रही है।

उन्होंने निवेशकों से कहा, जब मैं इन्फोसिस में अगस्त 2017 में दोबारा आया तो कंपनी की स्थिरता को लेकर आप चिंतित थे। हमारा बोर्ड काफी स्थायी है और सब लोग संगठित हैं और हम प्रभावशाली दौर में हैं।

एजीएम में पिछले साल की तरह कंपनी के सह संस्थापक एन. आर.नारायणमूर्ति मौजूद नहीं थे।

--आईएएनएस

08:47 PM
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