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रेस्टोरेंट चेन ने मुंबई के डब्बावालों पर निकाली कॉमिक बुक

मुंबई, 16 जून (आईएएनएस)। रेस्टोरेंट चेन सोडा बॉटल ओपनर वाला की ओर से मुंबई के बहुचर्चित डब्बावालों यानी रोजाना लोगों तक टिफिन बॉक्स पहुंचाने वालों पर एक स्पेशल कॉमिक बुक डब्बावाला बनाई गई है।

मुंबई के डब्बावालों पर पिछले छह सालों में दूसरी बार कॉमिक बुक बनाई गई है। इससे पहले साल 2013 में अंग्रेजी-मराठी संस्करण में इन पर एक कॉमिक बुक को प्रकाशित किया गया था जिसका नाम था टीना एंड टिफिन।

अभिजीत कीनी द्वारा लिखित और चित्रित इस कॉमिक बुक को शुक्रवार की रात मुंबई के लोअर परेल के पैलेडियम मॉल में सोडा बॉटल ओपनर वाला के आउटलेट में आयोजित एक समारोह में रिलीज किया गया।

इस मौके पर बड़ी संख्या में मौजूद डब्बावालों समारोह की शोभा बढ़ाई। गायिका-अभिनेत्री से शेफ बनी अनैदा परवनेह की ओर से उनके लिए शानदार शाकाहारी दावत भी तैयार की गई। अनैदा इस मशहूर रेस्टोरेंट श्रृंखला की पार्टनर भी हैं।

इस कॉमिक बुक को बनाने का विचार अनैदा के मन की ही उपज है। उन्होंने इस बारे में कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से मुंबई डब्बावालों की फैन हैं और उनके लिए कुछ करना चाहती थी।

इस कॉमिक बुक की लॉचिंग पर अनैदा ने कहा, मैं उन्हें सम्मानित करना चाहती थी और अन्तत: मुझे वह मौका मिला। सोडा बॉटल ओपनर वाला में हमारे लिए डब्बावाले सही मायने में मुंबई की सच्ची भावना का प्रतिनिधित्वकरते हैं और वे हमारे लिए हीरो हैं।

मुंबई डब्बावाला एसोसिएशन के अध्यक्ष उल्लास एस मुके ने कहा कि उन्हें खुशी हुई कि लोगों ने उनके काम और उनकी बिरादरी के योगदान को पहचाना।

--आईएएनएस

10:33 AM

छात्रवृत्ति घोटाला : कैसे अधिकारियों, बैंकरों ने गरीब छात्रों को धोखा दिया

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। करोड़ों रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की शुरुआती जांच से सरकारी अधिकारियों, निजी संस्थानों और सार्वजनिक सेक्टर के बैंकों के बीच गरीब छात्रों के लिए जारी फंड खा जाने के मामले में गहरे गठजोड़ का पता चला है। इस वजह से अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र भी बेसिक शिक्षा के लिए मिलने वाली छात्रवृत्ति से महरूम रहे हैं।

सीबीआई के सूत्रों ने आईएएनएस से खुलासा किया कि गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) परिवारों के लिए छात्रवृत्ति फंड में घोटाले के तार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब तक फैले हुए हैं।

हालांकि सीबीआई की शिमला शाखा द्वारा क्षेत्र में जांच की संभावना सीमित है। सूत्रों ने कहा कि घोटाला बड़े पैमाने पर हुआ है और इसी तरह की शिकायत उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश और देश के अन्य भागों से मिली है।

सीबीआई के उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा, गरीब और एससी/एसटी छात्रों के हित में, अगर अन्य राज्य इसकी हमसे जांच कराने की अनुशंसा करेंगे तो एजेंसी ऐसे कई मामलों की जांच कर सकता है।

एजेंसी ने खुलासा किया कि लवली प्रोफेशनल विश्वविद्यालय और कर्नाटक विश्वविद्यालय ने हिमाचल प्रदेश जैसे अन्य राज्यों में अपने केंद्र स्थापित किए हैं, जहां एससी/एसटी और बीपीएल छात्रों के दस्तावेज ले लिए जाते हैं लेकिन दाखिला नहीं दिया जाता है। बाद में शिक्षा विभाग और बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से, सरकार द्वारा प्रमाणित वास्तविक दस्तवाजों और पतों के आधार पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए जाते हैं।

उदाहरण के लिए, हिमाचल के कांगड़ा के देहड़ी गांव के करीब 250 छात्रों ने इन केंद्रों पर दाखिले के लिए आवेदन किया। इन संस्थानों ने छात्रों से दस्तावेज ले लिए लेकिन उन्हें दाखिला नहीं दिया।

उसी प्रकार, छात्रों द्वारा दाखिल किए गए दस्तावेजों के आधार पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इलाहबाद बैंक में बड़ी संख्या में फर्जी खाते खोले गए हैं और बैंक अधिकारी खाताधारकों के खाते का सत्यापन न कर इन घोटालेबाजों को छात्रवृत्ति का पैसा गटक जाने का मौका देते हैं।

गत माह, सीबीआई ने प्री व पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति से संबंधित 250 करोड़ रुपये के घोटाले के संबंध में उत्तरी भारत में कई ठिकानों पर छापे मारे थे। सीबीआई अधिकारियों ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और हरियाणा के 22 शैक्षणिक संस्थानों पर छापे मारे थे।

सीबीआई के अलावा, उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश पुलिस भी छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही है, जहां शिक्षा विभाग और निजी संस्थान के अधिकारी के हाथ भी इन घोटाले से रंगे नजर आए। उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित घोटाले में गरीब मुस्लिम छात्रों की छात्रवृत्ति भ्रष्ट अधिकारी धोखाधड़ी कर डकार गए।

--आईएएनएस

08:53 PM

पंजाब के स्कूलों में यूनिफॉर्म और किताबों की बिक्री पर रोक

चंडीगढ़, 15 जून (आईएएनएस)। पंजाब सरकार ने स्कूल परिसर में यूनिफॉर्म और किताबों की बिक्री पर रोक लगा दी है। राज्य के शिक्षा मंत्री इंदर सिंगला ने शनिवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि सीबीएसई, आईसीएसई और पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध सभी निजी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अभिभावकों से उनकी निर्धारित दुकान या फर्म से स्कूल यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने के लिए न कहें।

दिशा-निर्देशों में यह भी कहा गया है कि स्कूल में एक बार पेश की जाने वाली यूनिफॉर्म को कम से कम तीन साल तक चलाया जाना चाहिए और उस अवधि के दौरान इसके रंग या डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा, स्कूल प्राधिकारियों के लिए बोर्ड पाठ्यक्रम के आधार पर अनुमोदित पुस्तकों का उपयोग करना और स्कूल की वेबसाइट पर उन पुस्तकों की सूची अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस फैसले के बाद से यह विद्यार्थियों और अभिभावकों के विवेक पर निर्भर करता है कि वे किताबें कहां से खरीदें।

--आईएएनएस

06:33 PM

कई नेपाली स्कूलों में मैंडरीन की पढ़ाई हुई अनिवार्य : रिपोर्ट

काठमांडू, 15 जून (आईएएनएस)। भाषा सिखाने वाले शिक्षकों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने के चीनी सरकार के प्रस्ताव के मद्देनजर नेपाल के कई स्कूलों के छात्रों के लिए मैंडरीन भाषा सीखना अनिवार्य कर दिया है।

10 प्रसिद्ध निजी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और कर्मियों ने द हिमालयन टाइम्स को बताया कि उनके संस्थान में मैंडरीन सीखना अनिवार्य कर दिया गया है।

एलआरआई स्कूल के संस्थापक और समिति के अध्यक्ष शिवराज पंत के अनुसार, पोखरा, धूलिकेल और देश के अन्य हिस्सों में कई निजी स्कूलों ने भी छात्रों के लिए मैंडरीन अनिवार्य कर दिया है।

स्कूल-स्तरीय शैक्षणिक पाठ्यक्रम डिजाइन करने वाले, पाठ्यक्रम विकास केंद्र में सूचना अधिकारी गणेश प्रसाद भट्टराई ने कहा, स्कूलों को विदेशी भाषा सिखाने की अनुमति है, लेकिन वे उसे छात्रों के लिए अनिवार्य नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, अगर किसी विषय को अनिवार्य बनाना है, तो यह तय करना हमारा काम है, न कि स्कूलों का।

द हिमालयन टाइम्स से बात करने वाले स्कूलों को इस नियम के बारे में जानकारी है, लेकिन मुफ्त में मिल रहे मैंडरीन शिक्षकों को देखते हुए, उन्होंने इस नियम को अनदेखा कर दिया।

यूनाइटेड स्कूल के प्रधानाध्यापक कुलदीप नुपेन ने कहा, चीनी दूतावास द्वारा नि:शुल्क शिक्षकों को उपलब्ध कराने पर सहमति के बाद हमने दो साल पहले ही अनिवार्य विषय के रूप में मंदारिन की शुरुआत कर दी थी।

अन्य कई स्कूलों ने भी इस बात की पुष्टि की कि मैंडरीन शिक्षकों का वेतन काठमांडू के चीनी दुतावास द्वारा दिया जाता है।

--आईएएनएस

01:00 PM

मुस्लिम छात्रों को मिली 80 फीसदी सरकारी छात्रवृत्ति

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। साल 2018-19 में केंद्र सरकार की 20 योजनाओं के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति का करीब 80 फीसदी मुस्लिम छात्रों को दिया गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल के अनुसार, इसके बाद ईसाई छात्रों को 7.5 फीसदी छात्रवृत्ति मिली, सिख छात्रों को पांच प्रतिशत और हिंदू छात्रों को सिर्फ 4.7 प्रतिशत छात्रवृत्ति मिली।

इस सत्र में 1.4 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले थे जिनमें से 1.08 करोड़ छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई।

छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों में 88 लाख मुस्लिम, 8.26 लाख ईसाई, 5.45 लाख सिख और 5.2 लाख हिंदू हैं।

छात्रवृत्ति पाने वालों में 1.94 लाख (1.8 प्रतिशत) बौद्ध तथा 1.07 लाख (एक प्रतिशत) जैन छात्र भी हैं।

इस दौरान 14 केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा जारी छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 2018-19 में 2,157 करोड़ रुपये वितरित किए गए।

इस दौरान कुल राशि में से 1,032 करोड़ रुपये मुस्लिम छात्रों पर, 183 करोड़ रुपये सिख छात्रों और 128 करोड़ रुपये हिंदू छात्रों पर व्यय किए गए।

कुल छात्रवृत्ति का 77 फीसदी देकर अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय शीर्ष पर रहा।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, उच्च शिक्षा विभाग, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग भी शीर्ष पांच में रहे।

छात्रवृत्ति पाने वाले शीर्ष पांच राज्यों में पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और केरल रहे।

इन योजना के तहत जिन राज्यों को सबसे ज्यादा धनराशि मिली, उनमें उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा जिसे 336 करोड़ रुपये मिले, वहीं दूसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल रहा जिसे 281 करोड़ रुपये मिले।

--आईएएनएस

09:33 AM

उच्च न्यायालय ने डीयू के नए दाखिला मानदंड को निरस्त किया

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय में अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में नए दाखिला मानदंड को खारिज कर दिया।

अदालत विश्वविद्यालय के अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए पात्रता के नए मानदंड को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की खंडपीठ ने दाखिला पात्रता मानदंड में संशोधन को खारिज करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय को पिछले साल के पात्रता मानदंड का अनुपालन करने का निर्देश दिया।

अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय को यह भी निर्देश दिया कि भविष्य में जब कभी विश्वविद्यालय दाखिले के लिए पात्रता मानदंड में संशोधन करे तो दाखिला से छह महीने पहले इस संबंध में नोटिस जारी करे न कि दाखिले से ऐन पहले जैसा कि इस साल किया गया।

--आईएएनएस

10:13 PM

प्रवेश मानदंड में संशोधन का निर्णय चर्चा बाद लिया गया : डीयू

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश पात्रता मानदंड में संशोधन के अपने निर्णय का बचाव करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि नए प्रवेश मानदंडों का निर्धारण हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श के बाद किया गया था।

स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए विश्वविद्यालय के नए पात्रता मानदंड को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर डीयू का जवाब आया है।

डीयू ने न्यायाधीश अनु मल्होत्रा और तलवंत सिंह की खंडपीठ से कहा, विशेष रूप से बीए वाणिज्य और बीए अर्थशास्त्र (ऑनर्स) में स्नातक पाठ्यक्रमों में अतिरिक्त पात्रता मानदंड का निर्धारण बहुत विचार-विमर्श और संबंधित क्षेत्रों में हितधारकों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद किया गया है।

विश्वविद्यालय ने अदालत को बताया कि यह शिक्षा के लिए बेहतर मानकों को तैयार करने की एक प्रक्रिया के हिस्से के रूप में निर्णय किया गया है।

डीयू ने अदालत को यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को हमेशा शिक्षा के बेहतर मानकों को लागू करने के लिए सशक्त किया जाता है और ऐसा करने के लिए विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है।

विश्वविद्यालय ने कहा कि दरअसल, विद्यार्थियों को दी जाने वाली शिक्षा के मानक के कारण ही डीयू को बाकी विश्वविद्यालयों की तुलना में अधिक प्राथमिकता मिलती है।

पीठ ने कहा कि डीयू को उसके शिक्षा मानकों में सुधार करने से कोई नहीं रोक रहा है।

पीठ ने कहा, कोई नहीं कह रहा है कि आपका निर्णय (संशोधन) सही नहीं है, लेकिन आप के निर्णय का समय शायद सही नहीं है।

अदालत ने टिप्पणी की कि डीयू को तीन महीने पहले विद्यार्थियों को इस बात की सूचना देनी चाहिए थी।

--आईएएनएस

07:03 PM

नीट (यूजी)-2009 को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को छात्रों के एक समूह की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें छात्रों ने दावा किया था कि एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता-सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के चार प्रश्नों की उत्तर कुंजी गलत थी। परीक्षा 5 मई को आयोजित की गई थी।

न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और सूर्यकांत की अवकाश पीठ ने कहा कि न्यायाधीश विषय विशेषज्ञ (सब्जेक्ट एक्सपर्ट) नहीं हो सकते और इसलिए, वे राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के ऊपर एक अपीलीय निकाय के रूप में नहीं बैठ सकते।

अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, ऐसे मुद्दों में अदालत द्वारा देरी से हस्तक्षेप बहुत हो गया..हम कभी-कभार सोचते हैं कि क्या हमें खुद को विशेषज्ञ की तरह मानना चाहिए?

अदालत ने यह भी कहा कि जिन्होंने प्रश्नों को जांचा है, न्यायाधीश उससे बेहतर विशेषज्ञ नहीं हो सकते।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा, अगर हम विषय विशेषज्ञ बन जाएंगे तो सभी बहुविकल्पीय प्रश्नों की जांच क्या अदालत द्वारा की जाएगी?

अदालत ने इसके साथ ही मामले के हल के लिए किसी विषय विशेषज्ञ को नियुक्त करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय से अपनी याचिका वापस ले ली।

नीट परीक्षा की काउंसिलिंग 19 जून को प्रस्तावित है।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और अजय रस्तोगी की अवकाश पीठ ने गुरुवार को उस रिट याचिका की सुनवाई पर सहमति जताई थी, जिसे हैदराबाद के छात्र कयाथी रोहन रेड्डी और तीन अन्य छात्रों की ओर से वकील महफूज नाजकी ने दायर किया था। छात्रों ने दावा किया था कि इस गलती से लाखों छात्र प्रभावित हो सकते हैं, जो परीक्षा में शामिल हुए थे।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने शीर्ष अदालत से नीट यूजी-2009 को आयोजित करवाने वाली एजेंसी- एनटीए को 5 जून को प्रकाशित अंतिम उत्तर कुंजी को निरस्त करने के लिए आदेश देने की मांग की थी।

--आईएएनएस

05:40 PM
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 मोदी ने कृषि में संरचनात्मक सुधारों के लिए उच्चस्तरीय समिति घोषित की

मोदी ने कृषि में संरचनात्मक सुधारों के लिए उच्चस्तरीय समिति घोषित की

नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कृषि में संरचनात्मक सुधारों की सिफारिश के लिए एक उच्चस्तरीय समिति की घोषणा की, जिसमें मुख्यमंत्रियों को शामिल किया जाएगा। साथ ही उन्होंने राज्यों से 2024 तक भारत को 50 खरब डॉलर (5,000 अरब डॉलर) की अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान देने का आग्रह किया।

नीति आयोग की शासी परिषद की 5वीं बैठक में अपनी समापन टिप्पणी में उन्होंने एक भारत, श्रेष्ठ भारत अंब्रेला के तहत विभिन्न राज्यों के निवासियों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां वर्तमान में भारत को एक अनूठा अवसर प्रदान करती हैं, क्योंकि देश खुद को ईज ऑफ डुइंग बिजनेस जैसे वैश्विक बेंचमार्क पर स्थापित कर रहा है।

उन्होंने कहा, हमें 2024 तक भारत को 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का प्रयास जल्द से जल्द शुरू करना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए, राज्यों को अपनी अर्थव्यवस्था को 2 से 2.5 गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखना चाहिए। इसके परिणामस्वरूप आम आदमी की क्रय शक्ति बढ़ जाएगी।

मोदी ने मुख्यमंत्रियों से अपने राज्य की निर्यात क्षमता का अध्ययन करने और निर्यात संवर्धन पर काम करने का आह्वान किया।

कृषि में संरचनात्मक सुधारों पर समिति के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि इसमें कुछ मुख्यमंत्रियों को भी शामिल किया जाएगा और इस विषय पर समग्र दृष्टिकोण लिया जाएगा।

केंद्र में बनाए गए दो नए मंत्रालयों और एक नए विभाग के निर्माण का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय में द्वीप विकास विभाग, लगभग 1,300 द्वीपों के विकास पर काम करेगा जो भारत का हिस्सा हैं।

उन्होंने तटवर्ती राज्यों से आग्रह किया कि वे समुद्र तट से सटे द्वीपों के संबंध में एक पहल करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खनन क्षेत्र रोजगार के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है, लेकिन उन्होंने याद दिलाया कि कई राज्यों में खदानों के परिचालन में अड़चनें अभी भी बनी हुई हैं।

उन्होंने कहा, नीति आयोग इन मुद्दों पर काम कर रहा है।

उन्होंने राज्यों को समय-समय पर आकांक्षी जिलों की प्रगति की समीक्षा करने का भी आह्वान किया और कहा कि आकांक्षी जिलों में शासन के एक नए मॉडल को स्थापित करने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ साझेदारी करने और भारत के विकास के लिए मिलकर काम करने की इच्छुक है।

उन्होंने कहा कि भारत को अपनी पानी की समस्याओं को हल करने के लिए प्राथमिकता देने और सही कदम उठाने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री ने गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के लिए एक परिणाम आधारित दृष्टिकोण का आह्वान किया।

--आईएएनएस

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