• Last Updates : 10:50 PM
Last Updated At :- 24-06-2018 09:48 PM

जलवायु परिवर्तन से निपटने विकासशील देशों को मदद की दरकार : भारत

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को विकसित देशों को उनकी प्रतिबद्धता की याद दिलाते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से निपटने के लिए विकासशील देशों को मदद की दरकार है।

जलवायु परिवर्तन के मसले पर ब्रसेल्स में आयोजित यूरोपीय संघ के उच्चस्तरीय कार्यक्रम में सुषमा स्वराज ने कहा कि विकसित देशों की राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को मूर्त पहल व परियोजना के रूप में परिवर्तित करने की उनकी क्षमता में अभिरुचि, स्थाई व पर्याप्त वित्त और प्रौद्योगिकी का अभाव रुकावट पैदा करता है।

उन्होंने कहा, पेरिस समझौता या 2030 के एजेंडा को महत्वाकांक्षी व प्रभावी तरीके से हासिल करने के लिए जरूरी संसाधन का पैमान बहुत बड़ा है।

सुषमा स्वराज ने कहा, इन प्रक्रियाओं में वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता है, जोकि इसके लिए प्रस्तावित समाधानों के केंद्र में है।

ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते के तहत जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए विकसित देशों को 2020 से विकासशील देशों की मदद के लिए कम से कम 100 अरब डॉलर की रकम देनी होगी। यह रकम विकासशील देशों को उनके राष्ट्रीय निर्धारित योगदान को पूरा करने के लिए प्रदान करना जरूरी है।

भारत को अपने जलवायु लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 2030 तक कम से कम 2,500 अरब डॉलर की रकम की दरकार है। हाल ही में सरकार ने बताया कि उनकी दो परियोजनाओं को 13.44 करोड़ डॉलर विश्व जलवायु कोष (जीसीएफ) से मिला है।

सुषमा स्वराज ने कहा, अगर हमें पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्य को हासिल करना है तो धन और प्रौद्योगिकी के लिए दुनिया में एक समान योजना की जरूरत होगी।

उन्होंने कहा, इसके बिना विकासशील देशों को अपने मौजूदा राष्ट्रीय निर्धारित योगदान लक्ष्य को हासिल करने में गंभीर व्यवधान का सामना करना पड़ेगा। उनसे किसी भी प्रकार की आकांक्षा बढ़ाने के लिए उनकी मदद में बढ़ोतरी करनी होगी।

 इन्फोसिस ने कारोबार बढ़ाने डिजिटल रणनीति पर दांव लगाया

इन्फोसिस ने कारोबार बढ़ाने डिजिटल रणनीति पर दांव लगाया

बेंगलुरू, 23 जून (आईएएनएस)। सॉफ्टवेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक व अध्यक्ष नंदन एम. नीलेकणि ने शनिवार को कहा कि मौजूदा रोमांचकारी दौर में इन्फोसिस कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल रणनीति पर दांव लगा रही है।

कंपनी की 37वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को नीलेकणि ने बताया, हम अपने उद्योग के सफर के रोमांचकारी मोड़ पर हैं। आज हम साझेदारी करने और अपने ग्राहकों में इजाफा करने की जितनी संभावनाएं देख रहे हैं, उतनी संभावनाएं मैंने पहले कभी नहीं देखी है। डिजिटल क्रांति से हर उद्योग व क्षेत्र में बदलाव आ रहा है और हम उसमें निमग्न होते जा रहे हैं।

नीलेकणि (63) ने 10.94 अरब डॉलर का कारोबार करने वाली प्रमुख आईटी कंपनी इन्फोसिस में आठ साल बाद दोबारा अगस्त 2017 में अपनी नई पारी की शुरुआत की। पूर्व में कंपनी के सीईओ पद से त्यागपत्र देने के बाद वह केंद्र सरकार के संगठन यूआईडीएआई के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाले थे।

बतौर कंपनी अध्यक्ष पहली बार एजीएम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया, मनोरंजन, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाएं, खुदरा और फार्माश्युटिकल हर जगह डिजिटीकरण का क्षेत्र व्यापाक बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा, नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके, इंटरनेट ऑफ थिंग्स का लाभ उठाकर ग्राहक सेवा की नई विधि तैयार करके डिजिटल प्रौद्योगिकी व्यवसाय के नये तरीके पैदा कर रही है।

उन्होंने निवेशकों से कहा, जब मैं इन्फोसिस में अगस्त 2017 में दोबारा आया तो कंपनी की स्थिरता को लेकर आप चिंतित थे। हमारा बोर्ड काफी स्थायी है और सब लोग संगठित हैं और हम प्रभावशाली दौर में हैं।

एजीएम में पिछले साल की तरह कंपनी के सह संस्थापक एन. आर.नारायणमूर्ति मौजूद नहीं थे।

--आईएएनएस

08:47 PM
Stock Exchange
Live Cricket Score

Create Account



Log In Your Account