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Last Updated At :- 23-01-2019 09:16 PM

चोकसी ने भारतीय नागरिकता छोड़ी (लीड-2)

मुंबई, 21 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में अपने खिलाफ चल रही जांच को और पेचीदा बनाते हुए 13,500 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी ने वेस्टइंडीज के एंटीगुआ एवं बरबुडा द्वीप की नागरिकता पाने के लिए भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

चोकसी को पिछले वर्ष यहां की नई नागरिकता मिली थी और उसने अपने रद्द भारतीय पासपोर्ट संख्या जेड3396732 को कॉपरेटिव रिपब्लिक ऑफ गुयाना के भारतीय उच्चायुक्त में जमा करवा दिया है और अन्य औपचारिकताओं के लिए 177 डॉलर का शुल्क चुकाया है।

कॉपरेटिव रिपब्लिक ऑफ गुयाना में भारतीय उच्चायोग एंटीगुआ व बरबुडा और सेंट किट्स व नेविस के लिए भी अधिकृत है।

मुंबई में चोकसी के वकील से आईएएनएस ने जब संपर्क किया तो, उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि अब वह उनके (चोकसी के) संपर्क में नहीं हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में सूत्रों ने कहा कि नए मामले के बावजूद, भारत सरकार एंटीगुआ और बरबुडा के जरिए कूटनीतिक और कानूनी उपायों के माध्यम से चोकसी को कानून की जद में लाने का प्रयास करते रहेंगे।

चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी पर पीएनबी की ब्रेडी हाउस शाखा के जरिए कुछ बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से अपनी समूह की कंपनियों के लिए फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी कर 13,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला करने का आरोप है।

चोकसी द्वारा भारतीय नागरिकता छोड़ने के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के लिए नई मुसीबत पैदा हो सकती है, जो नीरव मोदी और उसके अन्य संबंधियों के प्रत्यर्पण के बारे में सोच रही थी। ऐसा माना जा रहा है कि नीरव मोदी के रिश्तेदार दुनिया के विभिन्न देशों में छुपे हुए हैं।

 ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

लंदन, 22 जनवरी (आईएएनएस)। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक खास ब्रेन ट्रेनिंग एप तैयार किया हैं, जो कनेक्टेड दुनिया में लोगों का दैनिक ध्यानभंग होने और एकाग्रता नहीं होने में सुधार करता है।

शोधकर्ताओं के दल ने इस ब्रेन ट्रेनिंग एप का नाम डिकोडर रखा हैं, जिसकी आइपैड पर एक महीने तक रोजाना आठ घंटों तक परीक्षण किया गया और इससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार दर्ज किया गया।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बिहेविरल और क्लिनिकल न्यूरोसाइंस के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस एप को इस्तेमाल करने से लोगों की एकाग्रता बढ़ जाएगी।

साइकियाट्री विभाग की प्रोफेसर बारबरा ने कहा, जब हम कार्यालय से घर लौटते है, तो हमें महसूस होता है कि हम दिन भर काफी व्यस्त रहे हैं, लेकिन हमें यह ध्यान नहीं रहता है कि हमने पूरे दिन क्या काम किया।

बिहेविरल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध पत्र में उन्होंने कहा कि जटिल कार्यो के लिए हमें फ्लो और एकाग्रता की जरूरत होती है।

शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने 75 स्वस्थ वयस्कों को तीन समूहों में बांटा, जिसमें से एक समूह को डिकोडर एप दिया गया, दूसरे समूह को बिंगो गेम खेलने के लिए दिया और तीसरे समूह को कोई भी गेम नहीं दिया गया।

सभी प्रतिभागियों को चार हफ्तों तक एक निश्चित समय तक गेम और एप का इस्तेमाल करने को कहा गया।

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जिन्होंने डिकोडर एप का इस्तेमाल उन्होंने बिंगो खेलनेवालों या फिर गेम नहीं खेलनेवालों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

शोधकर्ताओं के दल ने कहा, प्रदर्शन में महत्वपूर्ण और सार्थक अंतर था, और इसका प्रभाव मेथाफेनिडेटी या निकोटीन जैसे स्टिमुलस का प्रयोग करने जितना ही प्रभावी था।

--आईएएनएस

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