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Last Updated At :- 23-01-2019 08:56 PM

जयराम, कारवां के खिलाफ डोभाल ने मानहानि का मुकदमा किया

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल के बेटे विवेक डोभाल द्वारा कांग्रेस नेता जयराम रमेश, कारवां पत्रिका और एक लेखक के खिलाफ दायर मानहानि के एक मुकदमे का संज्ञान लिया है।

अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी समर विशाल ने मामले की सुनवाई के लिए 30 जनवरी का दिन निर्धारित किया है। उस दिन शिकायतकर्ता विवेक डोभाल और दो अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

पत्रिका ने दावा किया था कि विवेक डोभाल केमैन आईलैंड्स में एक हेज फंड चलाते हैं।

विवेक डोभाल ने अदालत से कहा कि अभियुक्त ने उनके खिलाफ निराधार आरोप लगाए हैं और इससे उनकी वर्षो के कठोर परिश्रम से अर्जित प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हुई है।

शिकायत में कहा गया है, लेख के साथ ही प्रेस कांफ्रेंस का इंटरनेट के माध्यम से नई दिल्ली समेत दुनिया भर में अबाधित प्रसार हुआ है।

विवेक डोभाल ने अदालत से यह भी कहा कि आरोपियों के बयान सच से बहुत दूर हैं।

उन्होंने कहा कि आरोपियों ने किसी तथ्य की पुष्टि करने का कोई प्रयास नहीं किया, जो कि उनके इरादे को दर्शाता है।

 ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

लंदन, 22 जनवरी (आईएएनएस)। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक खास ब्रेन ट्रेनिंग एप तैयार किया हैं, जो कनेक्टेड दुनिया में लोगों का दैनिक ध्यानभंग होने और एकाग्रता नहीं होने में सुधार करता है।

शोधकर्ताओं के दल ने इस ब्रेन ट्रेनिंग एप का नाम डिकोडर रखा हैं, जिसकी आइपैड पर एक महीने तक रोजाना आठ घंटों तक परीक्षण किया गया और इससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार दर्ज किया गया।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बिहेविरल और क्लिनिकल न्यूरोसाइंस के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस एप को इस्तेमाल करने से लोगों की एकाग्रता बढ़ जाएगी।

साइकियाट्री विभाग की प्रोफेसर बारबरा ने कहा, जब हम कार्यालय से घर लौटते है, तो हमें महसूस होता है कि हम दिन भर काफी व्यस्त रहे हैं, लेकिन हमें यह ध्यान नहीं रहता है कि हमने पूरे दिन क्या काम किया।

बिहेविरल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध पत्र में उन्होंने कहा कि जटिल कार्यो के लिए हमें फ्लो और एकाग्रता की जरूरत होती है।

शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने 75 स्वस्थ वयस्कों को तीन समूहों में बांटा, जिसमें से एक समूह को डिकोडर एप दिया गया, दूसरे समूह को बिंगो गेम खेलने के लिए दिया और तीसरे समूह को कोई भी गेम नहीं दिया गया।

सभी प्रतिभागियों को चार हफ्तों तक एक निश्चित समय तक गेम और एप का इस्तेमाल करने को कहा गया।

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जिन्होंने डिकोडर एप का इस्तेमाल उन्होंने बिंगो खेलनेवालों या फिर गेम नहीं खेलनेवालों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

शोधकर्ताओं के दल ने कहा, प्रदर्शन में महत्वपूर्ण और सार्थक अंतर था, और इसका प्रभाव मेथाफेनिडेटी या निकोटीन जैसे स्टिमुलस का प्रयोग करने जितना ही प्रभावी था।

--आईएएनएस

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