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Last Updated At :- 23-01-2019 09:11 PM

पिछले लोकसभा चुनाव में धांधली का दावा करने वाले के खिलाफ पुलिस में शिकायत

नई दिल्ली, 22 जनवरी (आईएएनएस)। निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को सैयद शुजा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शुजा ने दावा किया है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हैक कर धांधली की गई थी।

पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) को संबोधित एक पत्र में निर्वाचन आयोग ने कहा कि लंदन में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शुजा ने जो दावे किए हैं, वह भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों, खासकर धारा 505 का उल्लंघन है, जो सार्वजनिक अपकार (पब्लिक मिसचीफ) से निपटती है।

पत्र में कहा गया है, मीडिया रपट से आयोग यह संज्ञान में आया है कि 21 जनवरी को लंदन में सैयद शुजा नामक व्यक्ति ने दावा किया कि वह ईवीएम डिजाइन टीम का सदस्य था और वह भारत में चुनाव में इस्तेमाल हुई ईवीएम को हैक कर सकता है। शुजा का यह कृत्य भारतीय दंड संहिता, खासकर इसकी धारा 505 (1) (बी) का उल्लंघन है।

पत्र में कहा गया है, इसके मद्देनजर आप से गुजारिश है कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर इसकी जांच कराएं।

अमेरिका में रहने वाले शुजा ने सोमवार को दावा किया था कि 2014 के आम चुनाव में धांधली हुई थी। भारत में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम की डिजाइन टीम का सदस्य होने का दावा करते हुए शुजा ने कहा था कि 2014 के आम चुनाव में हेरफेर के कारण कांग्रेस को 210 सीटें हारनी पड़ी थीं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की मौत हादसे के कारण नहीं हुई थी, बल्कि उनकी हत्या की गई थी, क्योंकि वह ईवीएम की हैकिंग के बारे में जानते थे।

 ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

लंदन, 22 जनवरी (आईएएनएस)। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक खास ब्रेन ट्रेनिंग एप तैयार किया हैं, जो कनेक्टेड दुनिया में लोगों का दैनिक ध्यानभंग होने और एकाग्रता नहीं होने में सुधार करता है।

शोधकर्ताओं के दल ने इस ब्रेन ट्रेनिंग एप का नाम डिकोडर रखा हैं, जिसकी आइपैड पर एक महीने तक रोजाना आठ घंटों तक परीक्षण किया गया और इससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार दर्ज किया गया।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बिहेविरल और क्लिनिकल न्यूरोसाइंस के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस एप को इस्तेमाल करने से लोगों की एकाग्रता बढ़ जाएगी।

साइकियाट्री विभाग की प्रोफेसर बारबरा ने कहा, जब हम कार्यालय से घर लौटते है, तो हमें महसूस होता है कि हम दिन भर काफी व्यस्त रहे हैं, लेकिन हमें यह ध्यान नहीं रहता है कि हमने पूरे दिन क्या काम किया।

बिहेविरल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध पत्र में उन्होंने कहा कि जटिल कार्यो के लिए हमें फ्लो और एकाग्रता की जरूरत होती है।

शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने 75 स्वस्थ वयस्कों को तीन समूहों में बांटा, जिसमें से एक समूह को डिकोडर एप दिया गया, दूसरे समूह को बिंगो गेम खेलने के लिए दिया और तीसरे समूह को कोई भी गेम नहीं दिया गया।

सभी प्रतिभागियों को चार हफ्तों तक एक निश्चित समय तक गेम और एप का इस्तेमाल करने को कहा गया।

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जिन्होंने डिकोडर एप का इस्तेमाल उन्होंने बिंगो खेलनेवालों या फिर गेम नहीं खेलनेवालों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

शोधकर्ताओं के दल ने कहा, प्रदर्शन में महत्वपूर्ण और सार्थक अंतर था, और इसका प्रभाव मेथाफेनिडेटी या निकोटीन जैसे स्टिमुलस का प्रयोग करने जितना ही प्रभावी था।

--आईएएनएस

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