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Last Updated At :- 24-06-2018 07:19 PM

शिवसेना ने आरबीआई गवर्नर के खिलाफ कार्रवाई की मांग की

मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। शिवसेना ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी से पूछा कि बड़े उद्योगपतियों द्वारा घोटाला कर देश से भागने के मामले में मौजूदा वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आरबीआई गवर्नर और बैंकों के प्रमुखों के खिलाफ क्या कार्रवाई की।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना और दोपहर का सामना के संपादकीय में कहा, घोटाले का ऋण देने के लिए बैंक के कितने चेयरमैन को जेल भेजा गया? यहां तक कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक के निदेशक हैं.. इसमें नोटबंदी के बाद केवल पांच दिनों में ही 745.59 करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट जमा किए गए।

पार्टी ने कहा कि गुजरात के कैबिनेट मंत्री जयेश वी. राडाडिया राजकोट डीसीबी के चेयरमैन हैं, इस बैंक ने भी देश में प्रतिबंधित नोट संग्रह करने में दूसरा स्थान हासिल किया। यहां 693.19 करोड़ रुपये के प्रतिबंधित नोट जमा किए गए।

शिवसेना ने कहा, कैसे इतनी बड़ी मात्रा में केवल एक एडीसीबी बैंक में पैसा जमा कराया जा सकता है? यह एक गंभीर समस्या है और इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

गोयल पर इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं देखने का आरोप लगाते हुए, भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने कहा कि सहकारी बैंकों में भेदभाव होता है और देश में विभिन्न सहकारी बैंकों के साथ अलग-अलग नियम लागू किए जाते हैं।

शिवसेना ने कहा, महाराष्ट्र के डीसीसीबी को पुराने नोटों को बदलने या स्वीकार करने से रोका गया, बाद में हालांकि इस निर्णय को वापस ले लिया गया, लेकिन इससे बैंकों की आर्थिक हालत काफी खस्ता हो गई।

संपादकीय के अनुसार, देश अभी भी नोटबंदी के प्रभाव से जूझ रहा है..रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर इसके सबसे बड़े दोषी हैं और इसके लिए उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

शिवसेना ने कहा, देश को बताया गया था कि नोटबंदी के बाद जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवाद समाप्त हो जाएगा। लेकिन वास्तविकता में, प्रधानमंत्री द्वारा किए गए इस घोषणा के एक दिन बाद ही राज्य में 2000 रुपये के नए नोटों के कई बंडल मिले थे।

 इन्फोसिस ने कारोबार बढ़ाने डिजिटल रणनीति पर दांव लगाया

इन्फोसिस ने कारोबार बढ़ाने डिजिटल रणनीति पर दांव लगाया

बेंगलुरू, 23 जून (आईएएनएस)। सॉफ्टवेयर क्षेत्र की अग्रणी कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक व अध्यक्ष नंदन एम. नीलेकणि ने शनिवार को कहा कि मौजूदा रोमांचकारी दौर में इन्फोसिस कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल रणनीति पर दांव लगा रही है।

कंपनी की 37वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों को नीलेकणि ने बताया, हम अपने उद्योग के सफर के रोमांचकारी मोड़ पर हैं। आज हम साझेदारी करने और अपने ग्राहकों में इजाफा करने की जितनी संभावनाएं देख रहे हैं, उतनी संभावनाएं मैंने पहले कभी नहीं देखी है। डिजिटल क्रांति से हर उद्योग व क्षेत्र में बदलाव आ रहा है और हम उसमें निमग्न होते जा रहे हैं।

नीलेकणि (63) ने 10.94 अरब डॉलर का कारोबार करने वाली प्रमुख आईटी कंपनी इन्फोसिस में आठ साल बाद दोबारा अगस्त 2017 में अपनी नई पारी की शुरुआत की। पूर्व में कंपनी के सीईओ पद से त्यागपत्र देने के बाद वह केंद्र सरकार के संगठन यूआईडीएआई के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाले थे।

बतौर कंपनी अध्यक्ष पहली बार एजीएम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया, मनोरंजन, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाएं, खुदरा और फार्माश्युटिकल हर जगह डिजिटीकरण का क्षेत्र व्यापाक बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा, नवीनतम प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके, इंटरनेट ऑफ थिंग्स का लाभ उठाकर ग्राहक सेवा की नई विधि तैयार करके डिजिटल प्रौद्योगिकी व्यवसाय के नये तरीके पैदा कर रही है।

उन्होंने निवेशकों से कहा, जब मैं इन्फोसिस में अगस्त 2017 में दोबारा आया तो कंपनी की स्थिरता को लेकर आप चिंतित थे। हमारा बोर्ड काफी स्थायी है और सब लोग संगठित हैं और हम प्रभावशाली दौर में हैं।

एजीएम में पिछले साल की तरह कंपनी के सह संस्थापक एन. आर.नारायणमूर्ति मौजूद नहीं थे।

--आईएएनएस

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