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Last Updated At :- 23-01-2019 04:31 PM

ध्यान सिर्फ ओलम्पिक पदक पर : बजरंग

नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। सुशील कुमार और योग्श्वर दत्त की छावं से बाहर निकलते हुए बजरंग पूनिया ने कुश्ती में अपनी एक अलग पहचान बनाई है और अब विश्व चैम्पियनशिप में दो पदक जीतने वाले इस भारतीय पहलवान की नजरों में सिर्फ ओलम्पिक पदक की चाहत है।

बजरंग, ओलम्पिक में पदक जीतने को लेकर आत्मविश्वास से भरे हैं। वह अगले साल टोक्यो में होने वाले ओलम्पिक खेलों में पदक पर नजरें जमाए बैठे हैं।

इस समय 65 किलोग्राम भारवर्ग में दुनिया के नंबर-1 पहलवान बजरंग का बीता साल शानदार रहा। उन्होंने राष्ट्रमंडल तथा एशियाई खेलों में पदक जीते। साथ ही विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक भी अपने नाम किए।

इस समय प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) के चौथे सीजन में हिस्सा ले रहे बजरंग ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उनकी एक ही इच्छा है वो है देश के लिए ओलम्पिक पदक जीतना और अपने आदर्श योगेश्वर के पदचिन्हों पर चलना।

बजरंग ने कहा, बीते सीजन में मेरे प्रदर्शन और मेरी फॉर्म तथा मेरी ट्रेनिंग को देखते हुए मैं यह आत्मविश्वास से कह सकता हूं कि मेरी 2020 की टोक्यो ओलम्पिक की तैयारी सही रास्ते पर चल रही है।

बजरंग ने हालांकि कहा कि इस समय उनका ध्यान विश्व चैम्पियनशिप पर है जो कि ओलम्पिक का टिकट हासिल करने के रास्ता भी है।

पीडब्ल्यूएल में मौजूदा विजेता पंजाब रॉयल्स के लिए खेल रहे बजरंग ने कहा, टोक्यो ओलम्पिक से पहले 2019 में होने वाली विश्व चैम्पियनशिप सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण टूर्नामेंट है। यह ओलम्पिक क्वालीफायर भी है। इसलिए मेरा पूरा ध्यान इस समय कजाकिस्तान में होने वाली विश्व चैम्पियनशिप पर है।

उन्होंने कहा, इसके बाद एशियन चैम्पियनशिप है। इन दोनों के अलावा कुछ दोस्ताना टूर्नामेंट है जिन्हें मेरे प्रशिक्षकों ने मेरे लिए तैयार किया है।

बजरंग ने पीडब्ल्यूएल की तारीफ की और कहा कि इससे भारतीय पहलवानों को अपने खेल के स्तर को सुधारने का मौका मिला है।

 ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

ब्रेन ट्रेनिंग एप डिकोडर लांच, एकाग्रता में सहायक

लंदन, 22 जनवरी (आईएएनएस)। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक खास ब्रेन ट्रेनिंग एप तैयार किया हैं, जो कनेक्टेड दुनिया में लोगों का दैनिक ध्यानभंग होने और एकाग्रता नहीं होने में सुधार करता है।

शोधकर्ताओं के दल ने इस ब्रेन ट्रेनिंग एप का नाम डिकोडर रखा हैं, जिसकी आइपैड पर एक महीने तक रोजाना आठ घंटों तक परीक्षण किया गया और इससे ध्यान और एकाग्रता में सुधार दर्ज किया गया।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के बिहेविरल और क्लिनिकल न्यूरोसाइंस के शोधकर्ताओं का कहना है कि इस एप को इस्तेमाल करने से लोगों की एकाग्रता बढ़ जाएगी।

साइकियाट्री विभाग की प्रोफेसर बारबरा ने कहा, जब हम कार्यालय से घर लौटते है, तो हमें महसूस होता है कि हम दिन भर काफी व्यस्त रहे हैं, लेकिन हमें यह ध्यान नहीं रहता है कि हमने पूरे दिन क्या काम किया।

बिहेविरल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित इस शोध पत्र में उन्होंने कहा कि जटिल कार्यो के लिए हमें फ्लो और एकाग्रता की जरूरत होती है।

शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने 75 स्वस्थ वयस्कों को तीन समूहों में बांटा, जिसमें से एक समूह को डिकोडर एप दिया गया, दूसरे समूह को बिंगो गेम खेलने के लिए दिया और तीसरे समूह को कोई भी गेम नहीं दिया गया।

सभी प्रतिभागियों को चार हफ्तों तक एक निश्चित समय तक गेम और एप का इस्तेमाल करने को कहा गया।

शोध के निष्कर्षो से पता चलता है कि जिन्होंने डिकोडर एप का इस्तेमाल उन्होंने बिंगो खेलनेवालों या फिर गेम नहीं खेलनेवालों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।

शोधकर्ताओं के दल ने कहा, प्रदर्शन में महत्वपूर्ण और सार्थक अंतर था, और इसका प्रभाव मेथाफेनिडेटी या निकोटीन जैसे स्टिमुलस का प्रयोग करने जितना ही प्रभावी था।

--आईएएनएस

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