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सरकार ने हज सब्सिडी खत्म की

नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि उसने वार्षिक हज यात्रा में हजारों मुस्लिमों को दी जाने वाली हज सब्सिडी को वापस लेने का फैसला किया है।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि यह सरकार के अल्पसंख्यकों के बिना तुष्टिकरण किए उन्हें सशक्त बनाने के एजेंडे के अनुरूप है।

नकवी ने यहां संवाददाताओं से कहा, यह हमारी नीति का हिस्सा है कि अल्पसंख्यकों का गरिमा के साथ व बिना तुष्टिकरण के सशक्तिकरण हो।

उन्होंने कहा कि सरकार वापस ली गई सब्सिडी राशि का इस्तेमाल अल्पसंख्यकों, खास तौर से लड़कियों की शिक्षा के लिए करेगी।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 2012 में धीरे-धीरे 2022 तक सब्सिडी वापस लेने की बात कहने के बाद सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से खत्म करने की नीति बनाई है।

सऊदी अरब द्वारा भारत का कोटा पांच हजार बढ़ाए जाने के बाद इस साल सबसे बड़ी संख्या में भारतीयों के हज यात्रा पर जाने की उम्मीद है।

इस साल कुल 1.75 लाख भारतीय मुस्लिम हज पर जा सकते हैं।

--आईएएनएस

06:07 PM

आधार सुरक्षा मजबूत करने चेहरा प्रमाणीकरण शुरू करेगा प्राधिकरण

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने सोमवार को कहा कि वह आधार सत्यापन के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा फीचर के रूप में चेहरा प्रमाणीकरण को जल्द ही शुरू करने जा रहा है।

यह नया फीचर जुलाई में शुरू किए जाने की संभावना है। इस सुविधा से फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन के जरिए प्रमाणीकरण में होने वाली असुविधा को हल किया जा सकेगा।

यूआईडीएआई ने एक बयान में कहा, हालांकि, चेहरे की पहचान फ्यूजन मोड में ही इस्तेमाल की जाएगी। यह केवल एकमात्र प्रमाणीकरण सुविधा फिंगरप्रिंट, आईरिस या वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के साथ ही प्रयोग किया जाएगा।

वर्तमान में यूआईडीएआई बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण के दो तरीके प्रदान करता है। पहला फिंगरप्रिंट और दूसरा आईरिस। बयान में कहा गया है कि ज्यादातर लोग इन दोनों विशेषताओं का उपयोग कर प्रमाणित करने में सक्षम हैं, जबकि कुछ लोगों को रूपरेखाओं में से एक का उपयोग करके बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण का उपयोग करने में कठिनाई होती है।

प्राधिकरण ने कहा, यूआईडीएआई ने एक जुलाई, 2018 तक पंजीकृत उपकरणों पर फ्यूजन मोड में चेहरा प्रमाणन को शुरू करने का निर्णय लिया है, ताकि अन्य बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण (फिंगरप्रिंट और आईरिस) में कठिनाई का सामना कर रहे लोग आसानी से प्रमाणित कर सके।

प्राधिकरण ने आगे कहा कि चेहरा प्रमाणीकरण सुविधा सभी निवासियों को अतिरिक्त विकल्प प्रदान करेगी, जिसमें समेकित प्रमाणीकरण होना चाहिए। इसके अलावा, सुविधा को जरूरत के आधार पर भी अनुमति दी जाएगी।

बयान में कहा गया है कि जब यूआईडीएआई डेटाबेस में चेहरे की तस्वीर पहले ही उपलब्ध है, तो प्राधिकरण की केंद्रीय पहचान डेटा रिपॉजिटरी (सीआईडीआर) में कोई नया डेटा जमा करने की कोई जरूरत नहीं है।

यूआईडीएआई के मुताबिक, प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता एजेंसियों (एयूयू) को तब एकमात्र प्रमाणीकरण सुनिश्चित करने की जरूरत होगी, जब एकल विधि विशिष्ट निवासियों के लिए काम नहीं कर रही होगी।

प्राधिकरण ने कहा, लैपटॉप और मोबाइल पर कैमरा अब आसानी से उपलब्ध है, जिससे किसी भी अतिरिक्त हार्डवेयर की आवश्यकता के बिना प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता एजेंसियों (एयूए) के लिए चेहरे की फोटो खींचना आसान होगा। सुरक्षा बढ़ाने के लिए चेहरा प्रमाणीकरण का एक अतिरिक्त कारक के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

इस प्रमाणीकरण सेवा की सुविधा के लिए, यूआईडीएआई बॉयोमीट्रिक डिवाइस प्रदाताओं के साथ काम करेगा, ताकि प्रमाणित पंजीकृत डिवाइसों में चेहरे की रूपरेखा को एकीकृत किया जा सके और अपेक्षित रूप से एकल पंजीकृत डिवाइस (आरडी) सेवा प्रदान की जा सके।

आधार प्रमाणीकरण का उपयोग बैंकों, दूरसंचार कंपनियों, पीडीएस, आयकर विभाग, कर्मचारियों की उपस्थिति आदि जैसी कई प्रणालियों द्वारा प्राथमिक पहचान सत्यापन पद्धति के रूप में किया जा रहा है।

बयान में कहा गया है, यह सुविधा उन लोगों के समेकित प्रमाणीकरण में मदद करने जा रही है, जिनके फिंगरप्रिंट, बुढ़ापे या कड़ी मेहनत की स्थिति में घिस चुके हैं और वे खुद को बायोमीट्रिक रूप से प्रमाणित नहीं कर पा रहे हैं।

--आईएएनएस

06:54 PM

विपश्यना आत्मबोध में सक्षम बनाती है : राष्ट्रपति

मुंबई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को कहा कि विपश्यना साधना से मस्तिष्क शुद्ध रहता है और इसके अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और इसका शरीर व दिमाग पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है जिसका लाभ अंतत: पूरे समाज को मिलता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विपश्यना तीन नियमों, नैतिकता, एकाग्रता और आत्मबोध- से मिलकर बनी है और यह मूल्य जागरूकता व आत्मनिरीक्षण से आते हैं। यह एक गैर सांप्रदायिक ध्यान पद्धति है और यह जाति, धर्म, भाषा, लिंग व आयु से निरपेक्ष सभी मानवों पर समान रूप से लागू होती है।

राष्ट्रपति ने उत्तर पश्चिम मुंबई के गोराई में विपश्यना वैश्विक पगोडा में दूसरे धम्मालय ध्यान केंद्र की आधारशिला रखने के बाद कहा कि विपश्यना ध्यान विधि भगवान बुद्ध द्वारा सिखाई गई। इसने न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत व दुनिया के लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।

राष्ट्रपति ने उस पगोडा में वैश्विक विपश्यना फाउंडेशन (जीवीएफ) के आभार दिवस में भी भाग लिया, जो विश्व का सबसे बड़ा गुंबद है, जिसके निर्माण में खंभों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। यह अरब सागर के तटीय इलाके के गोराई गांव में स्थित है।

आभार दिवस जीवीएफ संस्थापक एस.एन. गोयंका के शिक्षक सयागी यू बा खिन की 46 पुण्यतिथि की याद में आयोजित होता है। बा खिन बर्मा के पहले एकाउंटेंट जनरल थे व विपश्यना के प्रमुख प्राधिकारी थे, जिनकी याद में पगोडा बनाया गया। इसका उद्घाटन 2009 फरवरी में किया गया।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि विश्व का सबसे बड़ा पगोडा यहां है और जीवीएफ केंद्र इगतपुरी (नासिक) व देनगन पैलेस (नागपुर) विपश्यना ध्यान केंद्र को लोकप्रिय बना रहे हैं।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीवी राव, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा व दूसरे गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

--आईएएनएस

10:04 PM

तत्तापानी में गर्म पानी के झरनों को पहले जैसी हालत में लाया जाएगा : ठाकुर

शिमला, 14 जनवरी (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रविवार को कहा कि सरकार मंडी जिले में सतलुज नदी के किनारे बसे तत्तापानी गांव में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक गर्म पानी के झरनों को फिर से बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की राजधानी से 52 किलोमीटर दूर स्थित तत्तापानी में गर्म झरनों और गर्म स्नान को बरकरार रखने का मुद्दा जल्द ही राष्ट्रीय थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) और सतलज जल विद्युत निगम लिमिटेड के सामने उठाया जाएगा।

बिलासपुर जिले में 800 मेगावाट की कोल्डम पनबिजली परियोजना के लिए एनटीपीसी द्वारा बांध के निर्माण के बाद 2015 में तत्तापानी गांव के गर्म पानी के झरने जलमग्न हो गए थे।

ठाकुर ने कहा कि माहुनाग, कामरुनाग, शिकारी देवी और रेवालसर जैसे धार्मिक स्थानों को केंद्र सरकार की सहायता से विकसित किया जाएगा ताकि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।

मुख्यमंत्री ने तत्तापानी में आयोजित मकर संक्रांति महोत्सव को जिला स्तरीय महोत्सव घोषित किया।

इससे पहले उन्होंने एक स्वास्थ्य शिविर का उद्धघाटन किया जिसको शिमला के इंदिरा गांधी चिकित्सा कॉलेज और अस्पताल के चिकित्सकों ने लगाया था।

--आईएएनएस

09:40 PM

लालू के समर्थक दही-चूड़ा के साथ रांची जेल पहुंचे

रांची, 14 जनवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू यादव के सैकड़ों समर्थक रविवार को मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चूड़ा व तिलकुट के साथ जेल पहुंचे, लेकिन वह लालू से मिलने में नाकामयाब रहे और उन्हें निराश लौटना पड़ा।

रांची की एक अदालत द्वारा चारा घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री को मौजूदा समय में रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में रखा गया है। अदालत ने लालू को साढ़े तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है।

यह जानते हुए कि लालू यादव से किसी को मिलने की इजाजत नहीं है, फिर भी राजद के कार्यकर्ता जेल पहुंचे। फिर भी, जेल की नियमावली के अनुसार लालू के लिए लाए गए सभी सामानों को जेल के प्रवेश द्वार पर जमा कर लिया और रजिस्टर में इन्हें दर्ज करने के बाद उन्हें (लालू को) सौंप दिया गया।

लालू यादव के समर्थकों ने बीते सालों में पटना में मकर संक्रांति पर लालू के आवास पर दही-चूड़ा का आनंद लेने की बात याद की। समर्थकों ने इस बात पर संतोष जताया कि इस बार वे लोग अपने नेता के लिए दही-चूड़ा लेकर आए।

एक कार्यकर्ता जानकी यादव ने कहा, हम निराश हैं क्योंकि हम अपने नेता के साथ इस बार मकर संक्रांति नहीं मना रहे हैं। मैं लालू जी के लिए तिलकुट व दही-चूड़ा लाया गया था लेकिन मुझे उनसे मिलने की इजाजत नहीं मिली।

मकर संक्रांति के मौके पर हल साल पटना में लालू प्रसाद के आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया जाता रहा है। इसमें राजद कार्यकर्ताओं व नेताओं के अलावा दूसरे दलों के नेता भी शामिल होते रहे हैं।

--आईएएनएस

08:25 PM

दलाई लामा के उपदेश सुनने बोधगया पहुंचे रिचर्ड गेरे

पटना, 14 जनवरी (आईएएनएस)। हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड गेरे बौद्ध धर्म पर तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के तीन दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रविवार को बिहार के बोध गया पहुंचे।

दलाई लामा शनिवार को जब प्रार्थना कर रहे थे, तो गेरे को महाबोधि मंदिर में कुछ विदेशियों और भिक्षुओं के साथ देखा गया।

तिब्बती मठ के एक अधिकारी ने कहा, गेरे शनिवार को दलाई लामा से मिले।

अभिनेता बोध गया चौथी बार आए हैं। इससे पहले वह 2010, 2012 और 2017 में आ चुके हैं।

गेयर प्रिटी वुमन और रनवे ब्राइड जैसी फिल्मों के लिए जाने जाते हैं। वह दलाई लामा के हाई-प्रोफाइल अनुयायियों में से एक माने जाते हैं।

दलाई लामा बोधगया में दो जनवरी से हैं और उनके एक फरवरी तक यहां रहने की संभावना है।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए दुनियाभर से करीब एक लाख श्रद्धालुओं के बोधगया आने की संभावना है।

दलाईलामा अपनी मातृभूमि से पलायन करने के बाद से 1959 से भारत में रह रहे हैं।

--आईएएनएस

07:08 PM

केवल एक पीढ़ी को ही आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए : सोनम वांगचुक

नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। लद्दाख के शिक्षा सुधारक और अन्वेषक सोनम वांगचुक का कहना है कि आरक्षण नीति के तहत मिलने वाले लाभों को किसी परिवार की एक पीढ़ी तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। जिन परिवारों की एक पीढ़ी ने आरक्षण का लाभ ले लिया, उन्हें इस अधिकार को छोड़ देना चाहिए और अपनी अगली पीढ़ी को नहीं देना चाहिए।

फिल्म 3 इडियट्स में आमिर खान द्वारा निभाया गया प्रेरणादायक किरदार फुनशुक वांगडू शिक्षा सुधारवादी सोनम वांगचुक से ही प्रेरित था। वह कहते हैं कि शैक्षिक संस्थानों में सीटों में आरक्षण और रोजगार में आरक्षण देने वाली नीति में संशोधन किया जाना चाहिए और उसे एक परिवार में एक पीढ़ी तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।

वांगचुक ने आईएएनएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा, हमारे यहां जो लोग आरक्षण के हकदार हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जिन्हें ये लाभ मिल रहे हैं, उन्होंने शीर्ष पर एक क्रीमी लेयर बना लिया है।

आर्थिक स्थिति के आधार पर आरक्षण की आवश्यकता पर बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि मौजूदा आरक्षण नीति में सुधार की आवश्यकता है।

वांगचुक शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने और प्रशिक्षण के व्यावहारिक पहलुओं पर अधिक जोर देने के उद्देश्य के साथ लद्दाख में हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स (एचआईएएल) विश्वविद्यालय खोलने की योजना बना रहे हैं।

विश्वविद्यालय के बारे में बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि हालांकि अभी कोई ठोस योजना नहीं है लेकिन एक सोच यह है कि चूंकि पहाड़ इस संस्थान का मूल होंगे, इसलिए 50 फीसदी सीटों को लद्दाख के युवाओं के लिए अलग रखा जाना चाहिए।

एचआईएएल एक गैर-पारंपरिक विश्वविद्यालय होगा जो छात्रों को पर्वतों की जानकारी और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास का प्रशिक्षण देगा ताकि वे पहाड़ों में रहते हुए धन अर्जित कर सकें।

आईआईटी से पढ़े अन्वेषक ने मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर भी अपने विचार साझा किए जिसके बारे में कहा जा रहा है कि कुछ हद तक यह बेरोजगार इंजीनियरों को पैदा करने के लिए जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा, मैं दो चीजें देख रहा हूं। पहला ये कि जिस तरह से छात्रों को सिखाया जाता है उस तरीके को बदला जाए ताकि उन्हें उपयोगी और प्रासंगिक ज्ञान हासिल मिले। दूसरी चीज यह है जो उतनी ही महत्वपूर्ण है कि क्यूं हर कोई व्यक्ति सोचता है कि उसे कोई शख्स, कंपनी या सरकारी संस्थान नौकरी पर रख ले। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो छात्र के अंदर अपने कौशल को उभारकर और उसका इस्तेमाल कर खुद आगे बढ़ने को प्रेरित कर सके।

वांगचुक को उम्मीद है कि उन्हें उनकी परियोजना के लिए 26 जनवरी तक सात करोड़ रुपये मिल जाएंगे जो देश के दुर्गम लद्दाख क्षेत्र में एक विश्वविद्यालय के पहले पाठ्यक्रम को शुरू करने के लिए जरूरी 14 करोड़ रुपये का आधा हिस्सा है। इस पाठ्यक्रम का नाम इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट कोर्स होगा।

उन्होंने कहा कि अब तक आम लोगों से 4.6 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। बाकी की राशि औद्योगिक संस्थानों की पहल कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के जरिए 26 जनवरी तक इकट्ठी होने की उम्मीद है।

वांगचुक के अनुसार, कॉपोरेट सेक्टर से जैन इरिगेशन सिस्टम्स कंपनी ने हमेशा समर्थन किया है। इसी तरह एसेल और हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र की गैस कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने हमारी परियोजना में रुचि दिखाई है और ये सभी हमारे लिए प्रतिबद्ध हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र की पांच संस्थाओं ने परियोजना के लिए पांच करोड़ रुपये की राशि देने के लिए प्रतिबद्धता जताई है जिनमें भारतीय रेलवे, कोल इंडिया शामिल हैं। वह कहते हैं, चूंकि, यह सरकार का पैसा है, इसलिए इसे हम हमारी सहयोगी हिल काउंसिल ऑफ लद्दाख के माध्यम से हासिल कर सकते हैं।

वांगचुक विश्वविद्यालय को मान्यता दिलाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से संपर्क नहीं करेंगे। इसके बजाए वह उम्मीद करते हैं कि जम्मू और कश्मीर सरकार राज्य विधानसभा में एक विधेयक पारित करेगी जो संस्थान को राज्य विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता देगा।

--आईएएनएस

06:10 PM

आंध्र, तेलंगाना में उल्लास के साथ भोगी मनाया गया

हैदराबाद/विजयवाड़ा, 14 जनवरी (आईएएनएस)। तेलुगू राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के शहरों, गांवों में रविवार को भोगी उल्लास के साथ मनाया गया, जो संक्रांति का पहला दिन है।

फसलों का यह तीन दिवसीय त्योहार दोनों राज्यों में धूमधाम से मनाया जाता है।

लोगों ने सड़कों पर अलाव या भोगी जलाकर उसमें अनाज और घर के पुराने सामानों को जलाकर इस त्योहार की शुरुआत की।

लोग सड़क किनारे इकट्ठा हो गए और आग जलाया, जिसमें पुराने कपड़ों, दरी, झाड़ू आदि जला दिए। पुरुषों और महिलाओं ने भोगी के पास जाकर प्रार्थना किया, गीत गाया और नृत्य किया। युवाओं को आग के सामने सेल्फी लेते देखा गया।

त्योहार मनाने के लिए हैदराबाद या अन्य शहरों में काम करने वाले लोग बड़ी तादाद में अपने गांवों में लौटे।

त्योहार के मद्देनजर हैदराबाद, विजयवाड़ा और अन्य शहरों से लोगों को लाने के लिए दोनों राज्यों में 40 ट्रेनें और करीब 4,000 विशेष बसें संचालित की गईं।

गावों में त्योहार की रौनक देखने को मिली। महिलाओं ने अपने घर के प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाया, जबकि युवा पतंग उड़ाते नजर आए।

घर की सफाई करने के बाद महिलाएं गाय के गोबर के गोले जिसे गोबेम्मा कहा जाता है, उसे रंगोली के डिजाइन में रखती हैं। वे नई फसल के चावल, हल्दी और गन्ने को भी रखती हैं।

घरों को गेंदा के फूलों की लड़ी और आम की पत्तियों के वंदनवार से सजाया जाता है।

परिवार मंदिरों में पूजा-अर्चना करने जाते हैं और विभिन्न पकवान विशेष रूप से चावल और दाल से बना पोंगल बनाते हैं। बैलों को भी सजाया जाता है। मुर्गो की लड़ाई, सांडों की लड़ाई और कई ग्रामीण खेलों का भी आयोजन होता है।

अदालत द्वारा मुर्गो की लड़ाई पर रोक लगाने और पुलिस की चेतावनी मिलने के बावजूद कई जगहों खासकर आंध्र के तटीय इलाकों में इस लड़ाई का आयोजन हुआ।

इस खेल पर करोड़ों रुपयों का लेन-देन हुआ क्योंकि हर वर्ग के लोगों, व्यापारियों और यहां तक कि बड़ी हस्तियों ने भी खास नस्ल के मुर्गो के ऊपर दांव लगाया। आयोजक दो मुर्गो के पैरों पर छोटी सी छुरी बांध देते है और इस खेल का अंत एक मुर्गे की मौत के साथ होता है।

दोनों राज्यों के राज्यपाल ई.एस.एल नरसिम्हन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के उनके समकक्ष के. चंद्रशेखर राव ने लोगों को संक्रांति की बधाई दी।

--आईएएनएस

05:05 PM

मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई

कोलकाता, 14 जनवरी (आईएएनएस)। मकर संक्रांति के अवसर पर रविवार को पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में उस जगह डुबकी लगाई जहां नदी बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कड़ी ठंड के बावजूद सुबह से ही वार्षिक गंगासागर मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।

कोलकाता से लगभग 150 किलोमीटर दूर दक्षिण 24 परगना जिले में गंगासागर द्वीप हिंदुओं द्वारा शुभ माना जाता है। समुदाय के लोग मकर संक्रांति के दिन पवित्र स्नान के लिए यहां इकट्ठा होते हैं और कपिल मुनि मंदिर में नारियल का भोग भी लगाते हैं।

तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने करीब 3,000 पुलिसकर्मियों और सात ड्रोन की तैनाती की।

मेले के दौरान बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी सैटेलाइट फोन से लैस हैं।

कोलकाता में बाबूघाट से सागर द्वीप तक 100 किलोमीटर के मार्ग पर 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।

लगभग 55 विशाल एलईडी स्क्रीन यात्रियों को ट्रेनों, बसों, नौकाओं, ज्वार के समय एवं सुरक्षा सावधानियों से अवगत करा रहे हैं।

--आईएएनएस

04:41 PM

कैंसर से जूझ रहा शख्स जरूरतमंदों का निशुल्क भर रहा है पेट

चंडीगढ़, 14 जनवरी (आईएएनएस)। कारोबारी जगदीश लाल आहूजा 83 बरस के हैं और वह पिछले साढ़े तीन दशकों से गरीबों और जरूरतमंदों को निशुल्क भोजन करा रहे हैं। वह कैंसर से जूझ रहे हैं और अपने सामुदायिक कार्यो को जारी रखने के लिए उन्होंने अपनी कई संपत्तियां बेच दी हैं। इन सबके बावजूद जगदीश लाल आहूजा का उत्साह कम नहीं हुआ है।

वह कहते हैं कि यह कार्य उनके जीवन का मिशन है।

आहूजा ने चंडीगढ़ में पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) के गेट नंबर 2 के बाहर आईएएनएस से कहा, मैं अपनी आखिरी सांस तक इस लंगर को जारी रखूंगा। यह मुझे सुकून देता है। ईश्वर ने मुझे यह करने के लिए चुना है और मैं इसे जारी रखूंगा।

वह 1981 से चंडीगढ़ और इसके आसपास के क्षेत्रों में लंगरों का आयोजन कर रहे हैं। आहूजा ने पीजीआई के बाहर रोजाना लंगर लगाना शुरू किया, जहां 2001 से बड़ी संख्या में उत्तर भारत के सभी राज्यों से मरीज और उनके रिश्तेदार लंगर खा रहे हैं।

कई गरम कपड़ों में लिपटे आहूजा ने कहा, मैं यह खुद कर रहा हूं। पिछले कुछ वर्षो में कई लोगों ने मुझसे जुड़ने के लिए मुझे पैसे और अन्य चीजों की पेशकश की लेकिन मैंने किसी से कुछ नहीं लिया। मैं अपने खुद के संसाधनों से यह करना चाहता हूं। मैंने सभी पेशकश को मना कर दिया। मुझे लगता है कि ईश्वर मुझ पर मेहरबान है कि उसने मुझे इस काम को जारी रखने के योग्य बनाया है।

सामुदायिक कार्य करने की प्रक्रिया में आहूजा ने पिछले कुछ वर्षो में अपनी सात संपत्तियां बेच दी हैं।

उन्होंने कहा, मैं पैसे की वजह से इस लंगर में रुकावट नहीं आने दूंगा। हाल के कुछ वर्षो में हमें संख्या कम करनी पड़ी है। पहले हम 1,800 लोगों को भोजन कराते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग 500 हो गई है।

आहूजा का कहना है कि वह प्रतिकूल पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से ज्यादा पढ़ाई नहीं कर सके।

आहूजा को निशुल्क लंगर का आयोजन करने की प्रेरणा अपनी दादी माई गुलाबी से मिली, जो अपने गृहनगर पेशावर (अब पाकिस्तान) में गरीब लोगों के लिए लंगरों का आयोजन करती थीं। भोजन में दाल, सब्जियां, चावल, चपाती, केले और हलवा शामिल हैं। बच्चों के लिए आहूजा की पत्नी निर्मल आहूजा गुब्बारे, कैंडी, बिस्किट और अन्य खाद्य सामग्री एसयूवी पिकअप में रखकर लाती हैं।

फल के बड़े व्यापारी आहूजा ने कोई साधारण जीवन नहीं जीया है। वह 1947 में बंटवारे के समय अपने जन्मस्थान पेशावर से विस्थापित हो गए थे। उस समय उनकी उम्र 12 वर्ष थी। वह अपने परिवार के साथ शरणार्थी के तौर पर पंजाब के मनसा आ गए। बचपन में वह जीवनयापन करने के लिए रेलवे स्टेशन पर नमकीन दाल बेचा करते थे। वह बाद में पटियाला चले गए और गुड़ और फलों का कारोबार शुरू कर दिया।

1950 के दशक में आहूजा चंडीगढ़ चले गए, उस समय उनकी उम्र 21 वर्ष थी। उन्होंने एक फलों का ठेला ले लिया और केले बेचने शुरू कर दिए।

वह कहते हैं, यहां कोई अच्छी तरह से नहीं जानता था कि केलों को कैसे पकाया जाता है। मैंने यह शुरू किया और अच्छी कमाई करनी शुरू की।

आहूजा को बाद में क्षेत्र का राजा कहा जाने लगा और वह करोड़पति बन गए।

उन्होंने कहा, मैं किसी को भी खाली पेट जाने देना नहीं चाहता। मैंने अपने बचपन में बहुत मुश्किल दौर देखा है। मैं अभी भी वह दिन याद करता हूं। यदि मैं लोगों की परेशानी कम करने के लिए थोड़ा बहुत भी कर सकूं तो मैं करूंगा।

आहूजा पीजीआई भंडारे वाले और लंगर बाबा के नाम से मशहूर हैं। लंगर के लिए कतार हमेशा लंबी होती है। ऐसा कोई दिन नहीं होता, जब आहूजा पीजीआई स्थित लंगर स्थल ना आते हों।

लंगर के लिए आए कई लोग आहूजा के चरण स्पर्श की कोशिश करते हैं लेकिन आहूजा इससे काफी चिढ़ जाते हैं।

उन्हें आमतौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है, कृपया मेरे चरण स्पर्श मत कीजिए। मैं कुछ भी नहीं हूं और मैंने कुछ महान नहीं किया है। ईश्वर से आशीर्वाद लें।

पीजीआई में लगने वाला लंगर आहूजा द्वारा की जाने वाली एकमात्र सामाजिक गतिविधि नहीं है। वह वृद्धाश्रमों को भी आर्थिक मदद देते हैं, बच्चों में फल और कैंडी वितरित करते हैं। लोगों को गर्म कपड़े देते हैं और खुद को कई अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखते हैं। उन्हें चंडीगढ़ प्रशासन, कई अन्य संगठन और लोग सम्मानित भी कर चुके हैं। खुद को वर्चुअली अशिक्षित कहने वाले आहूजा की कार में एक मोबाइल टैबलेट है, जिसमें उनकी बेटी ने उनके सामाजिक कार्यो के वीडियो और तस्वीरें अपलोड की हुई हैं।

आहूजा को इन कार्यो में अपनी पत्नी निर्मल का पूरा सहयोग मिला हुआ है।

(यह साप्ताहिक फीचर श्रृंखला आईएएनएस और फ्रैंक इस्लाम फाउंडेशन की सकारात्मक पत्रकारिता परियेजना का हिस्सा है।)

--आईएएनएस

03:30 PM
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 रिलायंस निप्पन लाइफ एस्सेट देगी 5 फीसदी अंतरिम लाभांश

रिलायंस निप्पन लाइफ एस्सेट देगी 5 फीसदी अंतरिम लाभांश

मुंबई, 16 जनवरी (आईएएनएस)। रिलायंस निप्पन लाइफ एस्सेट मैनेजमेंट लि. ने मंगलवार को बताया कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी को 130 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है और कंपनी ने शेयरधारकों को पांच रुपये प्रति शेयर लाभांश जारी करने घोषणा की है।

यहां जारी बयान में रिलांयस म्यूचुअल फंड की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली कंपनी ने कहा है कि 31 दिसंबर, 2017 को समाप्त तिमाही में कंपनी ने 130 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, जो सालाना आधार पर 25 फीसदी की बढ़ोतरी है।

समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का राजस्व 470 करोड़ रुपये रहा, जोकि साल-दर-साल आधार पर 31 फीसदी की बढ़ोतरी है।

कंपनी के निदेशक मंडल ने पांच रुपये प्रति शेयर लाभांश जारी करने की घोषणा की है।

कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप सिक्का के हवाले से बयान में कहा गया है, हम लाभप्रद विकास की तरफ ध्यान जारी रखेंगे और भारत आ रहे खुदरा निवेशकों और विदेशी निवेशकों से पूंजी बाजार में सबसे अधिक हिस्सा प्राप्त करेंगे।

2017 के 31 दिसंबर तक कंपनी के प्रबंधन में 3,87,871 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां थीं।

--आईएएनएस

09:33 PM
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