• Last Updates : 09:33 PM

अमेरिका पाकिस्तान को यकीन दिला रहा कि भारत खतरा नहीं : मंत्री

इस्लामाबाद, 16 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तानी रक्षामंत्री खुर्रम दस्तगीर खान ने कहा है कि अमेरिका पाकिस्तान को यह यकीन दिलाने की कोशिश कर रहा है कि भारत खतरा नहीं है और पाकिस्तान को अपने पड़ोसी के साथ अपने रणनीतिक रुख में बदलाव करना चाहिए।

डॉन ने मंगलवार को दस्तगीर खान के हवाले से कहा, लेकिन सच्चाई तो सच्चाई है। भारत की क्षमता व मंशा दोनों आज पाकिस्तान के प्रति शत्रुतापूर्ण है।

मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, क्योंकि अमेरिका अफगानिस्तान में जीत नहीं रहा है।

उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) व सीमा पर भारत के आक्रामक रुख को अमेरिका वास्तविकता से कम आंक रहा है।

उन्होंने सभी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए अमेरिका से स्पष्ट रूप से वार्ता की मांग की।

दस्तगीर खान ने कहा, यह समय अमेरिका व पाकिस्तान के साथ शिष्ट व स्पष्ट रूप से सभी चीजों पर वार्ता का है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने पाकिस्तान से लगी सीमा पर सामग्री व सेना जमा कर रखा है।

उन्होंने कहा कि भारत आज तेजी से युद्ध करने वाला पड़ोसी है।

उन्होंने 2017 को एलओसी उल्लंघन में व नागरिकों की हत्याओं को लेकर सबसे घातक साल बताया।

मंत्री ने कहा, मौजूदा भारत सरकार द्वारा लगातार शत्रुतापूर्ण व पाकिस्तान विरोधी रुख से शांति के समर्थन के लिए जगह काफी कम हो गई है।

दस्तगीर खान ने कहा कि भारत सरकार ने पाकिस्तान की निंदा तेज कर दी है।

नेशन डॉट कॉम पीके ने मंत्री के हवाले से कहा, कुलभूषण जाधव का मामला दूसरे देशों में अशांति पैदा करने के प्रयास का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक जिम्मेदार परमाणु देश है और यह अपनी व्यापक बचाव की नीति जारी रखेगा।

--आईएएनएस

08:25 PM

मोदी ने इजरायली कंपनियों को मेक इन इंडिया के लिए आमंत्रित किया (राउंडअप)

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और इजरायल ने सोमवार को आतंकवाद से साथ मिलकर लड़ने का वादा किया, क्योंकि दोनों देश कूटनीतिक संबंधों के रजत वर्ष में अपने संबंधों को व्यापक बनाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायली कंपनियों को आमंत्रित करते हुए कहा कि वे भारत में रक्षा देश में उदार एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) का फायदा उठाएं और भारत में ज्यादा से ज्यादा निर्माण करें।

दोनों देशों ने मुक्त व्यापार और द्विपक्षीय निवेश संधि की आवश्यकता को रेखांकित किया।

अपने छह दिवसीय भारत दौरे के दूसरे दिन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यहां हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता बाद भारत और इजरायल ने साइबर सुरक्षा, तेल व गैस क्षेत्र समेत नौ समझौतों पर हस्तक्षार किए। साइबर सुरक्षा में सहयोग के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। दूसरा समझौता ज्ञापन तेल एवं गैस क्षेत्र में भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और इजरायल के ऊर्जा मंत्रालय के बीच हुआ।

नेतन्याहू ने अपने साझा बयान में मोदी को क्रांतिकारी नेता बताया, जिन्होंने पूरे देश को आगे ले जाने की शुरुआत की है।

मोदी ने प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने साझा संबोधन में कहा, हम हमारे लोगों की जिंदगी को छूने वाले क्षेत्रों में सहयोग के मौजूदा स्तंभों को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा, ये स्तंभ कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा हैं। हमने कृषि सहयोग में उत्कृष्टता केंद्रों का स्तर बढ़ाने पर विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने और नेतन्याहू ने हमारे पहले के निर्णय के कार्यान्वयन के लिए हमारी उत्सुकता को साझा किया।

उन्होंने कहा, इसके परिणाम धरातल पर दिखने भी लगे हैं। हमारी आज की चर्चा हमारे संबंधों के विस्तार और साझेदारी बढ़ने का सूचक है।

मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में उन्होंने इजरायली कंपनी को भारत में स्थानीय कंपनियों के साथ ज्यादा निर्माण करने के लिए उदार एफडीआई दौर का फायदा उठाने के लिए आमंत्रित किया है।

उन्होंने कहा, हम तेल व गैस, साइबर सुरक्षा, फिल्म और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में पहली बार निवेश कर रहे हैं।

मोदी ने कहा, हम अपने भौगोलिक क्षेत्रों के बीच लोगों और विचारों के प्रवाह को बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए सरकार से परे जाकर नीति सरलीकरण, बुनियादी ढांचे और संपर्क सूत्र और समर्थन जुटाने की जरूरत है।

बाद में विदेश मंत्रालय के सचिव (आर्थिक संबंध) विजय गोखले ने कहा, दोनों देशों ने कहा कि वे आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

यह पूछे जाने पर कि संयुक्त बयान में कहीं भी पाकिस्तान का नाम क्यों नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि हर बार देश का नाम लेना जरूरी नहीं है। इस मुद्दे पर विचारों में कोई अंतर नहीं था।

नेतन्याहू ने पिछले वर्ष मोदी के ऐतिहासिक इजरायल दौरे के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इजरायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे, जिससे सभी इजरायली और निश्चित ही भारतीय मूल के कई इजरायलियों को खुशी हुई थी।

नेतन्याहू ने कहा, हमें मुंबई में हुई आतंकवादी घटना याद है। हम ऐसी घटनाओं के आगे कभी हार नहीं मानेंगे और जवाब देंगे।

उन्होंने कहा, भारत में यहूदियों को कभी भी भेद-भाव का सामना नहीं करना पड़ा। यह भारत की महान सभ्यता, सहिष्णुता और लोकतंत्र का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि तीन चीजें भारत और इजरायल को एक साथ लाती हैं। एक दोनों के पास प्राचीन सभ्यता है, दोनों के पास जोशपूर्ण भविष्य है और दोनों भविष्य के अवसर का उपयोग करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, भारत और इजरायल की दोस्ती से काफी फायदा होगा।

मोदी ने प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने साझा संबोधन में कहा, हम हमारे लोगों की जिंदगी को छूने वाले क्षेत्रों में सहयोग के मौजूदा स्तंभों को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा, ये स्तंभ कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा हैं। हमने कृषि सहयोग में उत्कृष्टता केंद्रों का स्तर बढ़ाने पर विचार साझा किए।

मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में उन्होंने इजरायली कंपनी को भारत में स्थानीय कंपनियों के साथ ज्यादा निर्माण करने के लिए उदार एफडीआई दौर का फायदा उठाने के लिए आमंत्रित किया है।

हवाई परिवहन समझौते में संशोधन पर भारत और इजरायल के बीच एक प्रोटोकॉल पर भी हस्ताक्षर किए गए। भारत और इजरायल के बीच संयुक्त रूप से फिल्म निर्माण पर भी एक समझौता हुआ।

होम्योपैथिक दवाओं में अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग से संबंधित एक तीसरे समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर आयुष मंत्रालय के केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद और इजरायल के शारे जेडक मेडिकल सेंटर के सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड कंप्लीमेंटरी मेडिसिन के बीच हुआ।

अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के लिए भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) और टेक्नियन-इजरायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

भारत में निवेश और इजरायल में निवेश पर एक आशय ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर हुआ। इंडियन ऑयल और इजराइल के फिनर्जी लिमिटेड ने धातु-हवा बैटरी के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक आशय-पत्र पर हस्ताक्षर किए।

इंडियन ऑयल और इजरायल के येदा रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड के बीच एक अन्य आशय पत्र पर हस्ताक्षर सकेंद्रित सौर तापीय प्रौद्योगिकी में सहयोग के लिए किए गए।

इससे पहले सोमवार को इजरायली प्रधानमंत्री का यहां राष्ट्रपति भवन में पारंपरिक स्वागत किया गया।

130 सदस्यीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ नेतन्याहू अपने छह दिवसीय भारत दौरे पर रविवार को पहुंचे। इस दौरान वह आगरा, अहमदाबाद और मुंबई जाएंगे।

किसी इजरायली प्रधानमंत्री का भारत दौरा 15 सालों बाद हो रहा है। इससे पहले 2003 में एरियल शेरॉन भारत दौरे पर आए थे।

--आईएएनएस

10:32 PM

राष्ट्रपति भवन में जैतून की पत्ती की चाय से नेतन्याहू का स्वागत

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और इजरायल के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग की मिसाल पेश करते हुए इजरायली प्रधाानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सोमवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बुलावे पर राष्ट्रपति भवन में जैतून की पत्ती से बनी चाय पेशकर उनका स्वागत किया गया।

राष्ट्रपति सचिवालय की ओर जारी एक बयान में कहा गया- इजरायली प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति भवन में जैतून की पत्ती की चाय पेश की गई। यह चाय राजस्थान ऑलिव कल्टीवेश लिमिटेड द्वारा राजस्थान और इजरायल की सरकार के संयुक्त उपक्रम में बीकानेर में उत्पादित जैतून की पत्ती से बनी थी।

बयान के मुताबिक, कोविंद ने नेतन्याहू से कहा कि उनकी भारत यात्रा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध की 25वीं वर्षगांठ समारोह की पराकाष्ठा है।

राष्ट्रपति ने कहा, हमारी नजदीकी व मित्रवत संबंध को ज्यादा मजबूती मिली है। पिछले करीब दो साल से दोनों देशों के बीच राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के दौरे हुए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच राजनीतिक समझ, सुरक्षा सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी प्रमुख रणनीतिक अनुबंध के स्तंभ हैं। उन्होंने भारत में खासतौर से जल, रक्षा, प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल्स के क्षेत्र में इजरायली कंपनियों की मौजूदगी की प्रशंसा की। उन्होंने उनसे मेक इन इंडिया, क्लीन इंडिया, स्मार्ट सिटीज और डिजिटल इंडिया जैसे कार्यक्रमों में भारत के साथ हिस्सेदारी करने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच सुरक्षा सहयोग को आतंकवाद के खिलाफ हमारे समान संघर्ष से परिभाषित किया जा सकता है।

कोविंद ने कहा, यह ऐसी चुनौती है जिससे हमारे समाज की जिंदादिली नष्ट हो रही है।

इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेतन्याहू की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद भारत और इजरायल ने नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें अनेक क्षेत्र शामिल हैं।

नेतन्याहू 130 सदस्यीय व्यवसायी प्रतिनिधिमंडल के साथ रविवार को अपनी छह दिन की भारत यात्रा पर रविवार को यहां पहुंचे। अपनी यात्रा के दौरान वह आगरा, अहमदाबाद और मुंबई भी जाएंगे।

2003 के बाद किसी इजरायली प्रधानमंत्री का पिछले 15 साल में यह पहला दौरा है।

--आईएएनएस

10:25 PM

एशियाई वित्तीय मंच में नहीं पहुंचा भारत

हांगकांग, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत सरकार का कोई प्रतिनिधि इस साल एशियाई वित्तीय मंच (एएफएफ) के कार्यक्रम में यहां शामिल नहीं हो रहा है। एक अधिकारी ने बताया कि इसी महीने दावोस में होने वाले विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के कार्यक्रम में मंत्री व अधिकारी हिस्सा लेने वाले हैं। लिहाजा, समयावभाव के कारण भारत ने उनका आमंत्रण स्वीकार नहीं किया।

हांगकांग ट्रेड डेवलपमेंट काउंसिल (एचकेटीडीसी) के अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, भारतीय मंत्रीगण व अधिकारियों ने समय की कमी के चलते हमारा निमंत्रण स्वीकार नहीं किया, क्योंकि वे 23-26 जनवरी के दौरान दावोस में होने वाले चार दिवसीय डब्ल्यूईएफ कार्यक्रम में जाने वाले हैं।

इसके अलावा, एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट (2018-19) की तैयारी और बैठक भी एक कारण है, जिसके चलते भारत हांगकांग में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन के 11वें संस्करण से अनुपस्थित है।

यहां इस कार्यक्रम में वैश्विक वित्तीय समुदाय के 100 वक्ता और 50 देशों के 3,000 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें चीन और अमेरिका भी शामिल हैं।

इससे पहले इस कार्यक्रम में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड के पूर्व चेयरमैन यू. के. सिन्हा और भारत की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी इन्फोसिस के सह-संस्थापक एन. आर. नारायणमूर्ति पहुंचे थे।

हालांकि, मुंबई से करीब 10 भारतीय प्रतिनिधि इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्र्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया का प्रतिनिधित्व करते हुए इस एएफएफ के 11वें संस्करण में हिस्सा ले रहे हैं।

--आईएएनएस

09:09 PM

ट्रंप की मध्यपूर्व शांति योजना मुंह पर तमाचे जैसी : अब्बास

रामल्लाह, 15 जनवरी (आईएएनएस)। फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रस्तावित शांति समझौते को मुह पर तमाचा मारने जैसा बताया।

अब्बास ने फिलिस्तीनी लिबरेशन आर्गनाइजेशन(पीएलओ) की केंद्रीय परिषद के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ट्रंप का शताब्दी समझौता मुंह पर तमाचा मारने के समान है। उन्होंने साथ ही कहा कि हम भी जवाबी तमाचा मारेंगे।

केंद्रीय समिति की यहां इजरायल के साथ संबंध, शांति प्रक्रिया पर रणनीतिक निर्णय और पिछले वर्ष दिसंबर में ट्रंप के जेरूसलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के निर्णय के खिलाफ चर्चा करने के लिए दो दिवसीय बैठक हो रही है।

अब्बास ने कहा, जेरूसलम का दर्जा मक्का जैसा है। जेरूसलम से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है।

फिलिस्तीन पूर्वी जेरूसलम को अपने स्वतंत्र देश की भविष्य की राजधानी के तौर पर मानता है, जिसे इजरायल ने 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान अपने कब्जे में ले लिया था। इजरायल पूरे जेरूसलम को अपना अभिन्न अंग मानता है।

अब्बास ने कहा, हमारे भाग्य, हमारे भविष्य, हमारे कारण और हमारे लोगों के जो विरुद्ध होता है, उसे हम ना कहते हैं। नहीं और हजार बार नहीं और हम अब ट्रंप को ना और ना कहते हैं और हमने ट्रंप के शताब्दी समझौते को शताब्दी का तमाचा कहा।

उन्होंने जोर देते हुए कहा, फिलिस्तीन भविष्य की गलतियों को नहीं करेगा या दोहराएगा। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण है, जो सभी फिलिस्तीनियों को तत्काल खड़ा होकर पवित्र राजधानी के भाग्य का बचाव करने के लिए कहता है।

इस बीच, अब्बास ने इस्लामिक हमास आंदोलन और इस्लामिक जिहाद की पीएलओ केंद्रीय परिषद की बैठक के बहिष्कार करने की आलोचना की।

अब्बास ने कहा, मैं इससे बहुत व्यथित हूं कि हमारे भाई अंतिम समय पर कहते हैं कि वे लोग इस बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे, क्योंकि बैठक की जगह सही नहीं है। उनकी आंखों में वह कौन-सी जगह है, जहां महत्वपूर्ण निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए जा सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, मैं इस्लामिक जिहाद पर आरोप नहीं लगा रहा हूं, क्योंकि वे लोग राजनीति का कार्य नहीं करते हैं, लेकिन मुझे हमास में मेरे भाइयों की चिंता होती है।

--आईएएनएस

07:15 PM

परमाणु चेतावनी के बावजूद भारत-पाकिस्तान वार्ता की जरूरत

इस्लामाबाद, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत की यह चेतावनी कि उनकी सेना पाकिस्तान के परमाणु धमकी के खिलाफ सीमा पार जाकर भी कार्रवाई करने के लिए तैयार है, इस सत्य को नहीं मिटा सकता कि दोनों देशों को आपस में बातचीत करने की जरूरत है। यह बात पाकिस्तान के एक अखबार ने सोमवार को कही।

अखबार डॉन ने भारत का आक्रामक बयान शीर्षक अपने संपादकीय में पाकिस्तान और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बैंकॉक में हुई हाल की बैठक को याद करते हुए कहा कि यह बैठक दर्शाती है कि दोनों देश यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि उनमें बातचीत पूरी तरह बंद हो जाने की चाहत नहीं है।

अखबार ने कहा कि जनरल बिपिन रावत के युद्धकारी और लापरवाह किस्म के बयान से सप्ष्ट है कि कोल्ड स्टार्ट सिद्धांत पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रणनीति का प्रमुख हिस्सा बन गई है।

आखबार ने आगे कहा, अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार करना युद्ध जैसा है और तब पाकिस्तान के पास इसका जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं होगा। पाकिस्तान अपनी धरती है, पर भारत की कार्रवाई को स्वीकार नहीं कर सकता।

--आईएएनएस

05:52 PM

इजरायली कंपनियों को व्यापार मुद्दे सुलझाने का आश्वासन

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के यहां आधिकारिक दौरे के दौरान भारत ने सोमवार को इजरायली कंपनियों को देश में व्यापार करने में आनेवाली समस्याओं को दूर करने का आश्वासन दिया और कहा कि इस संबंध में प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाएगा।

उद्योग मंडल सीआईआई द्वारा आयोजित इंडिया-इजरायल बिजनेस इनोवेशन फोरम में दिए गए अपने संबोधन में औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के सचिव रमेश अभिषेक ने इजरायली कंपनियों द्वारा आयात शुल्क, करों और लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं से संबंधित उठाए गए कुछ मुद्दों का जिक्र किया और कहा कि इन मुद्दों को हल करने के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ पहले से बातचीत जारी है।

अभिषेक ने कहा, मैं आपको सभी समस्याओं के समाधान का आश्वासन देता हूं और इजरायली कंपनियों के लिए भारत में व्यापार करना आसान होगा।

उन्होंने कहा, हम कुछ चीजें अगले कुछ महीनों में सुलझा लेंगे तथा कई पर काम चल रहा है।

इजरायल के प्रधानमंत्री भारत के छह दिन के दौरे पर यहां रविवार को पहुंचे। उनकी यात्रा के दौरान व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ सैन्य और रणनीतिक संबंधों को बढ़ाने पर भी बातचीत होगी।

इस फोरम को संबोधित करते हुए इजरायल के व्यापार आयुक्त ओहाद कोहेन ने उम्मीद जताई कि नेतन्याहू के दौरे से प्रस्तावित इजरालय-इंडिया मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) के लिए रास्ता तैयार होगा।

इस आयोजन में दोनों पक्षों के बीच आठ एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और इजरायल-एशिया चैंबर ऑफ कॉमर्स और इजरायल एक्सपोर्ट एंड इंटरनेशनल कॉपरेशन इंस्टीट्यूट के बीच एमओयू भी शामिल हैं।

--आईएएनएस

05:44 PM

भारत, इजरायल कृषि, विज्ञान और सुरक्षा सहयोग बढ़ाएंगे

नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि भारत और इजरायल कृषि, विज्ञान व प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए सहमत हुए हैं।

मोदी ने प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ अपने साझा संबोधन में कहा, हम हमारे लोगों की जिंदगी को छूने वाले क्षेत्रों में सहयोग के मौजूदा स्तंभों को मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा, ये स्तंभ कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा हैं। हमने कृषि सहयोग में उत्कृष्टता केंद्रों का स्तर बढ़ाने पर विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने और नेतन्याहू ने हमारे पहले के निर्णय के कार्यान्वयन के लिए हमारी उत्सुकता को साझा किया।

उन्होंने कहा, इसके परिणाम धरातल पर दिखने भी लगे हैं। हमारी आज की चर्चा हमारे संबंधों के विस्तार और साझेदारी बढ़ने का सूचक है।

मोदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में उन्होंने इजरायली कंपनी को भारत में स्थानीय कंपनियों के साथ ज्यादा निर्माण करने के लिए उदार एफडीआई दौर का फायदा उठाने के लिए आमंत्रित किया है।

उन्होंने कहा, हम तेल व गैस, साइबर सुरक्षा, फिल्म और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों में पहली बार निवेश कर रहे हैं।

मोदी ने कहा, हम अपने भौगोलिक क्षेत्रों के बीच लोगों और विचारों के प्रवाह को बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए सरकार से परे जाकर नीति सरलीकरण, बुनियादी ढांचे और संपर्क सूत्र और समर्थन जुटाने की जरूरत है।

नेतन्याहू ने अपने साझा बयान में मोदी को क्रांतिकारी नेता बताया, जिन्होंने पूरे देश को आगे ले जाने की शुरुआत की है।

उन्होंने पिछले वर्ष मोदी के ऐतिहासिक इजरायल दौरे के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इजरायल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे, जिससे सभी इजरायली और निश्चित ही भारतीय मूल के कई इजरायलियों को खुशी हुई थी।

नेतन्याहू ने कहा, हमें मुंबई में हुई आतंकवादी घटना याद है। हम ऐसी घटनाओं के आगे कभी हार नहीं मानेंगे और जवाब देंगे।

उन्होंने कहा, भारत में यहूदियों को कभी भी भेद-भाव का सामना नहीं करना पड़ा। यह भारत की महान सभ्यता, सहिष्णुता और लोकतंत्र का परिचायक है।

उन्होंने कहा कि तीन चीजें भारत और इजरायल को एक साथ लाती हैं। एक दोनों के पास प्राचीन सभ्यता है, दोनों के पास जोशपूर्ण भविष्य है और दोनों भविष्य के अवसर का उपयोग करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, भारत और इजरायल की दोस्ती से काफी फायदा होगा।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद भारत और इजरायल के बीच साइबर सुरक्षा और तेल व गैस क्षेत्रों से संबंधित नौ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।

इससे पहले सोमवार को, इजरायली प्रधानमंत्री का यहां राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया गया।

नेतन्याहू के साथ 130 सदस्यों का व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत की छह दिवसीय यात्रा पर आया है, जो आगरा, अहमदाबाद और मुंबई की भी यात्रा करेगा।

यह वर्ष 2003 में इजरायली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन की यात्रा के 15 वर्ष बाद किसी इजरायली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा है।

--आईएएनएस

05:37 PM

कुर्दिश बलों को प्रशिक्षण देने के अमेरिकी फैसले से तुर्की परेशान

अंकारा, 15 जनवरी (आईएएनएस)। तुर्की के विदेश मंत्रालय ने रविवार को उत्तरी सीरिया में सीमा नियंत्रण बल स्थापित करने के अमेरिकी कदम को एक एकतरफा निर्णय करार दिया।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, एक लिखित बयान में मंत्रालय ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका ने गठबंधन के किस सदस्य से इस पर सलाह ली और इस तरह के बल के गठन का फैसला किया।

बयान के अनुसार, गठबंधन के नाम पर इस एकतरफा कदम की व्याख्या बहुत ही गलत है जो दाएश (आतंकी संगठन आईएस) के खिलाफ हमारी लड़ाई को नुकसान पहुंचा सकता है।

मंत्रालय ने कहा, तुर्की अपने क्षेत्र को आसन्न किसी भी तरह के खतरे से निपटने को लेकर दृढ़ है।

मंत्रालय ने निंदा करते हुए इस कदम को गलत दृष्टिकोण करार दिया और कहा है कि तुर्की सभी प्रकारों के खतरों को समाप्त करने को लेकर सक्षम है।

तुर्की कुर्दिश मिलिशिया वाईपीजी को प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) की एक शाखा मानता है जिसे अमेरिका ने प्रशिक्षण देकर एक विशेष बल बनाने का निर्णय लिया है।

कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी का लक्ष्य एक स्वतंत्र कुर्दिस्तान की स्थापना है जिसमें तुर्की के कुर्द बहुल हिस्से शामिल हों। कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी पर अमेरिका ने भी प्रतिबंध लगाया हुआ है।

लेकिन, सीरियाई कुर्दिश मिलीशिया को अमेरिकी समर्थन को लेकर तुर्की और अमेरिका में विवाद रहा है।

--आईएएनएस

05:33 PM

भारत के सेना प्रमुख का बयान शांति के लिए नुकसानदेह : चीन (लीड-1)

बीजिंग, 15 जनवरी (आईएएनएस)। चीन ने रविवार को भारत के सेना प्रमुख बिपिन रावत के बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे अरचनात्मक बयान सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति को प्रभावित करेंगे।

जनरल रावत ने पिछले हफ्ते कहा था कि भारत को अपना ध्यान पाकिस्तान से सटी अपनी पश्चिमी सीमा से हटाकर चीन से सटी अपनी उत्तरी सीमा पर केंद्रित करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर चीन शक्तिशाली है तो भारत भी कमजोर नहीं है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, पिछले एक वर्ष के दौरान भारत और चीन के संबंधों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं।

लू ने कहा कि बीते सितंबर में भारत-चीन के नेताओं के बीच दोनों पक्षों के मतभेदों को सही तरीके से दूर करने और भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी थी।

लू ने कहा, हाल में दोनों पक्षों ने परामर्श और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत को आगे बढ़ाया है और सुधार एवं विकास को गति प्रदान की है।

लू ने आगे कहा, इस पृष्ठभूमि में भारत के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई अरचनात्मक टिप्पणी राष्ट्र केदो प्रमुखों की सहमति के खिलाफ है और दोनों पक्षों द्वारा द्विपक्षीय संबंधों में सुधार एवं विकास के लिए किए गए प्रयासों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा, यह सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने में सहायता नहीं करेगा।

रावत ने यह भी कहा था कि भारत को पड़ोसी देशों के साथ साझेदारी करके दक्षिण एशियाई क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को रोकने की जरूरत है।

रावत ने यह भी कहा था कि हो सकता है कि डोकलाम संकट सर्दियों की शुरुआत के कारण हल हो गया हो और आशंका जताई कि चीनी सैनिक फिर से वापस आ सकते हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि डोकलाम चीन और भूटान के बीच एक विवादित क्षेत्र है। इसे चीन डोंगलांग कहता है।

यह पूछे जाने पर कि रावत के कौन से बयान पर चीन को आपत्ति है, लू ने कहा, मैंने अपनी बात स्पष्ट कर दी है। यदि वरिष्ठ अधिकारी ने, रिपोर्ट के मुताबिक, डोंगलांग के संदर्भ में बात की है तो मैं समझता हूं कि इस मुद्दे पर आप हमारी स्थिति से वाकिफ हैं-डोंगलांग चीन का हिस्सा है और हमेशा से चीन के प्रभावी क्षेत्राधिकार में रहा है।

लू ने कहा, इस क्षेत्र में तैनात और गश्त लगाने वाले चीन के सैनिक हमारी संप्रभुता के अधिकारों का प्रयोग कर रही हैं। हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष ने इतिहास से सबक लिया होगा और इस तरह की दुर्घटनाओं से आगे बचने की कोशिश करेगा।

लू ने कहा, अगर वह समूची भारत-चीन सीमा की स्थिति के संदर्भ में बयान दे रहे हैं तो मैंने भी यह कहा है कि पिछले सितंबर में शियामेन शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रमुखों के बीच में सहमति बनी थी। उसके बाद से दोनों पक्षों ने प्रभावी बातचीत जारी रखी है।

उन्होंने कहा, हमारा लक्ष्य रणनीतिक संवाद को कायम रखने के लिए रणनीतिक रूप से आपसी विश्वास को बढ़ाना और सक्षम वातावरण बनाना है।

उन्होंने आगे कहा, ऐसी पृष्ठभूमि में आपके द्वारा उल्लिखित अधिकारी ने ऐसा बयान दिया है जो दोनों राष्ट्रों के प्रमुखों के बीच बनी सहमति के विरुद्ध है और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाने के सामान्य प्रवृत्ति के अनुरूप नहीं है। हम मानते हैं कि इस तरह के बयान सीमवर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के लिए मददगार नहीं है।

--आईएएनएस

05:19 PM
 रिलायंस निप्पन लाइफ एस्सेट देगी 5 फीसदी अंतरिम लाभांश

रिलायंस निप्पन लाइफ एस्सेट देगी 5 फीसदी अंतरिम लाभांश

मुंबई, 16 जनवरी (आईएएनएस)। रिलायंस निप्पन लाइफ एस्सेट मैनेजमेंट लि. ने मंगलवार को बताया कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनी को 130 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ है और कंपनी ने शेयरधारकों को पांच रुपये प्रति शेयर लाभांश जारी करने घोषणा की है।

यहां जारी बयान में रिलांयस म्यूचुअल फंड की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली कंपनी ने कहा है कि 31 दिसंबर, 2017 को समाप्त तिमाही में कंपनी ने 130 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया है, जो सालाना आधार पर 25 फीसदी की बढ़ोतरी है।

समीक्षाधीन अवधि में कंपनी का राजस्व 470 करोड़ रुपये रहा, जोकि साल-दर-साल आधार पर 31 फीसदी की बढ़ोतरी है।

कंपनी के निदेशक मंडल ने पांच रुपये प्रति शेयर लाभांश जारी करने की घोषणा की है।

कंपनी के कार्यकारी निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संदीप सिक्का के हवाले से बयान में कहा गया है, हम लाभप्रद विकास की तरफ ध्यान जारी रखेंगे और भारत आ रहे खुदरा निवेशकों और विदेशी निवेशकों से पूंजी बाजार में सबसे अधिक हिस्सा प्राप्त करेंगे।

2017 के 31 दिसंबर तक कंपनी के प्रबंधन में 3,87,871 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां थीं।

--आईएएनएस

09:33 PM
Stock Exchange
Live Cricket Score

Create Account



Log In Your Account