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नेपाल के प्रधानमंत्री चीन दौरे के लिए रवाना

काठमांडू, 19 जून (आईएएनएस)। नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली मंगलवार को चीन के छह दिवसीय दौरे पर रवाना हो गए।

फरवरी में सत्ता में आने के बाद भारत के बाद किसी विदेशी देश की उनकी यह दूसरी यात्रा है।

समाचार पत्र द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग के निमंत्रण पर वह चीन की यात्रा कर रहे हैं।

ओली के साथ 120 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी चीन के लिए रवाना हुआ, जिसमें चार मंत्रियों सहित सांसद, सरकारी अधिकारी और मीडियाकर्मी शामिल हैं।

प्रतिनिधिमंडल के साथ ओली के अपराह्न 2.30 बजे बीजिंग पहुंचने की संभावना है।

ओली बुधवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और गुरुवार को अपने समकक्ष ली से मुलाकात करेंगे।

समाचार पत्र द हिमालयन टाइम्स के मुताबिक, दोनों देश समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। दोनों राष्ट्रों के बीत अन्य करार भी होंगे।

प्रधानमंत्री और उनका प्रतिनिधिमंडल 24 जून को स्वदेश लौटेगा।

--आईएएनएस

12:49 PM

चीन के साथ सहयोग बढ़ाने का इच्छुक नेपाल : ओली

काठमांडू, 19 जून (आईएएनएस)। नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने अपने चीन दौरे से पहले कहा कि चीन की बेल्ट एवं रोड परियोजना के तहत नेपाल सीमा पार रेलमार्ग कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे का विकास, व्यापार, निवेश व पर्यटन सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है।

ओली मंगलवार को चीन के पांच दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं।

उन्होंने एक साक्षात्कार के दौरान सिन्हुआ को बताया कि चीन के साथ दो साल पहले हुए करार में नेपाल बेल्ट और रोड परियोजना के ढांचे के तहत सहयोग को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बेल्ट और रोड परियोजना के तहत परियोजनाओं को लागू करने के लिए एक विशेष तंत्र बनाया है और विभिन्न मंत्रालय एक ही लक्ष्य के लिए काम कर रहे हैं।

ओली ने कहा कि दोनों देशों के ट्रांस-हिमालयन बहुआयामी परिवहन नेटवर्क की अवधारणा पर एक समान रुख है।

उन्होंने कहा, इस व्यापक ढांचे के आधार पर चीन के साथ हम रेलवे, सड़क, ट्रांसमिशन लाइनों की सीमा पार कनेक्टिविटी और पारस्परिक लाभ के लिए अन्य संबंधित क्षेत्रों में सहयोग चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि नेपाल ने बेल्ट और रोड परियोजना को महत्वपूर्ण विकास पहल के रूप में देखा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नेपाल ने हाल ही में चीन के साथ सहयोग के लिए सड़कों, रेलवे, ऊर्जा, संचरण लाइन के क्षेत्रों में कुछ परियोजनाओं का प्रस्ताव दिया है।

ओली ने चीन के साथ नेपाल के संबंधों के बारे में बात करते हुए कहा कि चीन हमारा पड़ोसी है। दोनों देशों के दोस्ताना संबंधों का लंबा इतिहास साझा है।

ओली इस यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली केकियांग और अन्य वरिष्ठ चीनी नेताओं से मुलाकात करेंगे।

फरवरी में सत्तासीन होने के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा है।

--आईएएनएस

12:25 PM

अमेरिका, उत्तर कोरिया के बीच कोई फोन वार्ता नहीं हुई : व्हाइट हाउस

वाशिंगटन, 19 जून (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि बीते सप्ताहांत में अमेरिका और उत्तर कोरिया के अधिकारियों के बीच कोई फोन वार्ता नहीं हुई।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने फादर्स डे के मौके पर उत्तर कोरिया से फोन पर वार्ता करने की योजना बनाई थी।

सीएनएन के मुताबिक, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने सोमवार को इस बात की पुष्टि की है कि ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के बीच कोई फोन कॉल नहीं हुई।

प्रशासन ने भी पुष्टि की कि ट्रंप और उत्तर कोरिया के बीच कोई भी फोन वार्ता नहीं हुई।

उन्होंने फोन वार्ता नहीं होनो का कोई कारण नहीं दिया।

गौरतलब है कि 12 जून को ट्रंप ने सिंगापुर में किम जोंग उन से ऐतिहासिक मुलाकात की थी।

बैठक के दौरान ट्रंप और किम के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में काम करने की बात कही गई थी।

--आईएएनएस

11:37 AM

किम जोंग उन औचक दौरे पर चीन पहुंचे (लीड-1)

बीजिंग, 19 जून (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन मंगलवार से चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

किम जोंग का मार्च 2018 के बाद से यह चीन का तीसरा दौरा है।

चीन की सरकारी मीडिया ने मंगलवार सुबह इस खबर की पुष्टि की। किम जोंग का यह दौरा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 12 जून को सिंगापुर में हुई वार्ता के कुछ दिनों बाद हो रहा है।

किम जोंग ने इससे पहले मई में चीन का दौरा किया था, जहां उन्होंने चीन के डालियान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।

चीन, उत्तर कोरिया का एकमात्र निकट सहयोगी देश है।

यह मुलाकात अमेरिका और चीन के बीच खट्टे पड़े व्यापारिक संबंधों के बीच हो रही है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के सामान पर आयात शुल्क लगाया है।

हालांकि, इस दौरे की जानकारियों का तत्काल खुलासा नहीं हुआ है। किम जोंग यकीनन शी जिनपिंग से मिलेंगे और सिंगापुर में ट्रंप के साथ हुई बैठक पर जिनपिंग से चर्चा करेंगे।

सिंगापुर में ट्रंप और किम जोंग ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी।

--आईएएनएस

10:57 AM

किम जोंग उन 2 दिवसीय दौरे पर चीन पहुंचे

बीजिंग, 19 जून (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन मंगलवार से चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

किम जोंग की मार्च 2018 के बाद से यह चीन का तीसरा दौरा है।

चीन की सरकारी मीडिया ने मंगलवार सुबह इस खबर की पुष्टि की।

किम जोंग का यह दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ 12 जून को सिंगापुर में हुई वार्ता के कुछ दिनों बाद हो रहा है।

सिंगापुर में ट्रंप और किम जोंग ने कोरियाई प्रायद्वीप के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर प्रतिबद्धता जताई थी।

चीन, उत्तर कोरिया का एकमात्र निकट सहयोगी देश है।

--आईएएनएस

09:35 AM

मोदी का रणनीतिक दृष्टिकोण : आकांक्षा और वास्तविकता में अंतर

विश्व के हालात 2018 के मध्य में थोड़े असंमज से भरे दिख रहे हैं। जहां एक तरफ अमेरिका और चीन में ट्रेड-टैरिफ को लेकर टकराव की स्थिति है और अमेरिकी नेतृत्व वाली पश्चिमी दुनिया कनाडा में हालिया संपन्न जी-7 शिखर सम्मेलन के असमान व अप्रत्याशित परिणामों को लेकर काफी उथल-पुथल में है तो वहीं, सिंगापुर में 12 जून को डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन के बीच ऐतिहासिक बैठक से पूर्वी एशिया के सामरिक ढांचे के पूरी तरह से अप्रत्याशित पुनर्गठन की संभावना है।

इस पृष्ठभूमि के उलट भारत जिस तरह से प्रमुख शक्तियों से खुद को जोड़ रहा है और जो इसकी रणनीति है, उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक जून को सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला वार्ता के दौरान बताया गया। लंदन स्थित थिंकटैंक द्वारा 2001 में शुरू किया गया यह वार्षिक अंतर-सरकारी सम्मेलन एशिया-प्रशांत राजनीतिक नेतृत्व और क्षेत्रीय सैन्य, राजनयिक, अकादमिक, विश्लेषक समुदाय को एक साथ लाता है।

मोदी का संबोधन व्यापक बहु-संस्कृतियों व भाषाओं वाले देशों के मूल्यों के प्रति भारतीय प्रतिबद्धता के ठोस धरातल के समर्थन के साथ था।

यह नेहरू के राजनीति में शुरुआती वर्षों की याद दिलाता है, जब अपेक्षाकृत कमजोर भारत ने मौजूदा शीत युद्ध से दूर रहने की मांग की और खुद को गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में पहचाने जाने का फैसला किया था। हकीकत यह थी कि 1970 के दशक में अमेरिका-चीन के मेल-मिलाप के बाद भारत यूएसएसआर के करीब गया और रूस के साथ इसका बहुत ही मजबूत सैन्य आपूर्तिकर्ता वाला संबंध स्थापित हुआ।

दिसंबर 1991 में हालांकि सोवियत संघ के पतन के बाद वैश्विक रणनीतिक ढांचे में काफी बदलाव आया और वर्ष 1992 में प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में भारत ने अपने आर्थिक उदारीकरण और अमेरिका के साथ अपने रंजिशजदा संबंधों को बेहतर बनाने की शुरुआत की, जिसे नरसिम्हा के उत्तराधिकारियों अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह ने जारी रखा और यही विरासत अब मोदी को मिली है।

पिछले कुछ सालों में एक धारणा रही कि भारत घमंडी चीन द्वारा भड़काए तनाव के कारण अमेरिका के करीब आ गया था (यहां उस घटना को याद करना उचित लगता है कि भारत ने अक्टूबर 1962 में अमेरिका से मदद मागी थी और मई 1998 में समर्थन मांगा था) और भारत-रूस द्विपक्षीय संबंध भी प्रभावित हो गए थे।

मोदी ने अपने संबोधन में संकेत दिया कि भारत सभी प्रमुख शक्तियों जैसे अमेरिका, चीन, रूस और जापान के साथ एक मजबूत जुड़ाव चाहता है और आसियान गुट भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत-प्रशांत विस्तारित समुद्री क्षेत्र में नई दिल्ली की अपनी प्रासंगिकता है। अमेरिका द्वारा इसका समर्थन किया गया है, जिसने हवाई में अपने प्रशांत कमान का नाम बदलकर भारत-प्रशांत कमान रख दिया था।

जापान के साथ द्विपक्षीय संबंध को महान उद्देश्य वाली साझेदारी के रूप में वर्णित किया गया है, जो भारत की एक्ट ईस्ट नीति की आधारशिला है।

वहीं, दिल्ली-मॉस्को संबंधों पर बात की जाए तो मोदी ने एक बार कहा था, यह हमारी रणनीतिक कुशलता का एक प्रमाण है कि रूस के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त हो गई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ (मई के अंत में) सोची में एक अनौपचारिक बैठक मौजूदा समय की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को विकसित करने की दिशा में दोनों देशों की आकांक्षा पर आधारित थी।

चीन के साथ डोकलाम गतिरोध, बेल्ट एंड रोड पहल (बीआरआई) पर असहमति और आतंकवाद पर पाकिस्तान को समर्थन जैसे तनावों के बावजूद मोदी ने बहुत ही कारगर तरीका निकालते हुए कहा था, चीन के साथ भारत के संबंधों में जितनी परतें हैं, उतनी और किसी देश के साथ संबंधों में नहीं हैं।

वहीं, रणनीतिक स्वायत्तता और बहु-ध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था के लिए भारत की प्राथमिकता ईमानदार और वांछनीय है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि परमाणु हथियार की स्थिति के बावजूद दिल्ली एक असंगत शक्ति बना हुआ है। दो कठोर संकेतक इस विसंगति को दर्शाते हैं।

सबसे पहले मानव सुरक्षा के संबंध में बात करें, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का सर्वोच्च राजनीतिक उद्देश्य होता है। यहां भारत खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) के विश्वसनीय सूचकांक तक पहुंचने और अपने बच्चों को उपयुक्त शिक्षा प्रदान करने में असमर्थ है, जिनकी संख्या करोड़ों में है। जहां दिल्ली स्वयत्तता की बात करती है और मोदी मेक इन इंडिया का नारा लगाते हैं, वहीं स्थिति यह है कि भारत अभी भी आयात पर निर्भर है, जिसमें अधिकांश हिस्सा इसकी सैन्य आपूर्ति का है।

स्वदेशी रक्षा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र की वास्तव में कल्पना की गई है और यह असलियत से कोसों दूर है। चार बार रक्षा मंत्रियों का बदलाव शासन और राजनीतिक ²ढ़ संकल्प का एक कमजोर संकेत पेश करता है। अगर मोदी के दृष्टिकोण को वास्तव में सिद्ध किया जाना है तो भारत की लंगड़ाती आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से दुरुस्त किए जाने की आवश्यकता है।

--आईएएनएस

06:08 PM

सुषमा समझौते की प्रगति की समीक्षा के लिए फ्रांस पहुंचीं

पेरिस, 18 जून (आईएएनएस)। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अपनी दो दिवसीय दौरे के तहत सोमवार को पेरिस पहुंचीं। यहां मार्च में भारत गए फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों के दौरे के दौरान फ्रांस और भारत के बीच हुए समझौते की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

अपने चार वर्ष के कार्यकाल में सुषमा पहली बार फ्रांस का दौरा कर रही हैं। इस दौरान वह अपने फ्रांसीसी समकक्ष जीन य्वेस ले ड्रियन के साथ चर्चा करेंगी और राष्ट्रपति मैक्रों से भी मुलाकात कर सकती हैं।

ले ड्रियन के साथ चर्चा मुख्यत: दोनों पक्षों द्वारा समझौते की गति पर केंद्रित होगी। इस दौरान लॉजिस्टिक्स पर चर्चा होगी, जिससे दोनों देशों के सैन्य बलों की एक-दूसरे के सैन्य प्रतिष्ठानों पर पहुंच सुनिश्चित हो जाए।

दोनों मंत्री महत्वपूर्ण समझौते की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे। इस दौरान नई दिल्ली में मैक्रों द्वारा किए गए समझौते के तहत शैक्षणिक डिग्रियां और प्रमाणपत्र की पारस्परिक मान्यता और एग्रीमेंट ऑन मोबिलिटी पर चर्चा की जाएगी।

सुषमा भारत के साथ पड़ोसी देशों के संबंध के विकास के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगी, खासकर पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों की चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही भारत आतंकवाद पर भी फ्रांस के साथ वार्ता करेगा।

दोनों नेता सीरिया, ईरान ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन के बीच हुई वार्ता की भी समीक्षा करेंगे। भारत व यूरोपीय संघ समेत अमेरिका और इसके कई सहयोगियों के बीच बढ़ते व्यापारिक संकट पर भी वार्ता के दौरान चर्चा हो सकती है।

सुषमा निर्माणाधीन भारतीय संस्कृति केंद्र को स्वामी विवेकानंद को समर्पित करेंगी। अपने प्रवास के दौरान वह फ्रांस में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करेंगी और इसके साथ ही पेरिस में इंडिया हाउस की 50वीं वर्षगांठ पर इसका अवलोकन करेंगी।

--आईएएनएस

04:23 PM

ओली के चीन दौरे से द्विपक्षीय संबंध मजबूत होंगे

काठमांडू, 18 जून (आईएएनएस)। नेपाल के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के आगामी चीनी दौरे से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती में मदद मिलेगी।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ओली द्वारा रविवार को बुलाई गई बैठक में शेर बहादुर देउबा ने आगामी दौरे पर खुशी जताई।

संसद में विपक्षी पार्टी के नेता देउबा ने कहा, यह दौरा नेपाल के राष्ट्रीय हितों को पूरा करने के लिए फलदायी साबित होगा।

पुष्प कमल दहल ने चीन और दक्षिण एशिया के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

झलनाथ खनाल ने नेपाल और चीन के बीच मजबूत रेलरोड संपर्क स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया।

माधव कुमार नेपाल ने ओली को इस दौरे का प्रयोग नेपाल और चीन के बीच बहुमुखी संबंधों को रणनीतिक स्तर तक ले जाने के लिए प्रयोग करने की सलाह दी।

वहीं बाबूराम भट्टराई ने अपने विचार रखते हुए कहा कि नेपाल को चीन की प्रस्तावित बेल्ट एवं रोड पहल के तहत रेलरोड संपर्क परियोजना के लिए बीजिंग से समर्थन मांगना चाहिए।

ओली का चीन दौरा 19 जून से शुरू हो रहा है और यह 24 जून को समाप्त होगा।

फरवरी में सत्तासीन होने के बाद ओली का यह पहला चीनी दौरा होगा।

--आईएएनएस

02:01 PM

प्रभु के अमेरिका दौरे से बंधी व्यापार मुद्दे सुलझने की उम्मीद : सीआईआई

नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रविवार को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक मसलों को सुलझाने की राह सुगम बनाने के मकसद से वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के हालिया अमेरिका दौरे की सराहना की।

वाणिज्य मंत्री के दो दिवसीय (10-12 जून) अमेरिका दौरे में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री बिल्बर रॉस और यूनाइटेड स्टेटस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) रॉबर्ट लिग्थाइजर के साथ प्रभु की वाशिंगटन में कई दौर के दौरान भारत और अमेरिका द्विपक्षी व्यापार मसले को सुलझाने के लिए जल्द अधिकारी स्तर की बातचीत पर सहमत हुए।

उद्योग संगठन ने एक बयान में कहा, सीआईआई का मानना है कि यूएसटीआर के अधिकारी जल्द भारत आएंगे। उम्मीद है कि व्यापार मसलों पर बातचीत के पैकेज में भारत के लिए सामान्य वरीयता प्रणाली का नवीकरण भी शामिल होगा, जिसके तहत भारत अमेरिका को तकरीबन छह अरब डॉलर मूल्य निर्यात करता है।

अमेरिका ने मार्च में विदेशों से आयात होने वाले इस्पात पर 25 फीसदी और अल्युमीनियम पर 10 फीसदी शुल्क लगा दिया जिसको लेकर वैश्विक व्यापार युद्ध की संभावना पैदा हो गई क्योंकि चीन की ओर से इस पर प्रतिक्रिया जाहिर की गई। चीन और अमेरिका में व्यापारिक हितों के टकराव को लेकर परस्पर आयात शुल्क लगाने का सिलसिला आगे भी जारी रहा।

भारत की मांग है कि अमेरिका से यूरोपीय संघ, अर्जेटीना, आस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया की तरह उसे भी आयात शुल्क से मुक्त रखा जाए।

--आईएएनएस

10:36 PM

भारतवंशी मां की कानूनी लड़ाई के बाद बेटे का हत्यारा दोषी करार

कार्बनडेल (अमेरिका), 17 जून (आईएएनएस)। भारतीय मूल की अमेरिकी मां की चार साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अंतत: उसके बेटे के हत्यारे को दोषी करार दे दिया गया।

मीडिया रपटों के अनुसार, एक न्यायपीठ ने गुरुवार को कार्बनडेल में 2014 में प्रवीण वर्गीज की हत्या के लिए गेज बेथूने को दोषी ठहराया।

फैसले के बाद प्रवीण की मां लवली वर्गीज ने शिकागो ट्रिब्यून से कहा, आखिरकार प्रवीण का दिन आया है। अब उसे शांति मिले सकेगी।

प्रवीण की मौत को अधिकारियों द्वारा एक दुर्घटना बताए जाने के बाद उसकी मां ने लगातार मीडिया, राजनेता व जनता को संगठित करने का काम किया।

भारी दबाव के बाद अधिकारियों ने नए सिरे से जांच का आदेश दिया और एक विशेष अभियोजक नियुक्त किया।

कार्बनडेल पुलिस प्रमुख जोडी ओगुनिन को भी बर्खास्त किया गया।

बेथूने को अब 20 साल से 60 साल जेल की सजा हो सकती है।

प्रवीण (19) का शव एक जंगली इलाके से फरवरी 2014 में जमी हुई अवस्था में मिला था। दक्षिणी इलिनोइस विश्वविद्यालय के छात्र प्रवीण के लापता होने के चार दिन बाद उसका शव बरामद हुआ था।

स्थानीय कोरोनर ने उसकी मृत्यु को एक दुर्घटना बताया था और इसकी वजह अत्यधिक ठंड बताई थी।

लेकिन उसके परिवार ने एक स्वतंत्र पोस्टमार्टम कराई, जिसमें पाया गया कि उसकी मौत सिर पर गंभीर रूप से चोट लगने से हुई थी।

लवली वर्गीज ने इस निष्कर्ष को लेकर ध्यान खींचने के लिए कई संवाददाता सम्मेलन बुलाए।

वालंटियर्स फ्राम आर्कागेल्स ऑफ जस्टिस ने मामले का अध्ययन किया और रिपोर्ट लिखी। यह रिपोर्ट बेथुने की तरफ इशारा करती थी।

वालंटियर्स फ्राम आर्कागेल्स ऑफ जस्टिस एक सेवानिवृत्त कानून प्रवर्तन अधिकारियों का संगठन है।

--आईएएनएस

06:22 PM
 गूगल ने मैप्स से उबर राइड बुक करने का फीचर हटाया

गूगल ने मैप्स से उबर राइड बुक करने का फीचर हटाया

सैन फ्रांसिस्को, 19 जून (आईएएनएस)। बताया जा रहा है कि गूगल ने अपने गूगल मैप के अंदर से उबर राइड बुक करने की सुविधा खत्म कर दी है और इसका कोई कारण नहीं बताया है।

इस फीचर को गूगल मैप में पिछले साल जनवरी में जोड़ा गया था, इसके माध्यम से यूजर्स गंतव्य की इंट्री कर उबर का किराया पता लगकार सीधे मैप एप से ही राउड बुक कर सकते थे और उन्हें मैप बंद कर उबर एप को खोलने या उबर एप को इंस्टाल रखने की जरूरत नहीं होती थी।

एंड्रायड पुलिस की सोमवार देर रात की रिपोर्ट में कहा गया कि गूगल मैप्स हेल्प पेज पर गूगल ने केवल इतना कहा है, अब आप उबर राइड्स सीधे गूगल मैप्स से बुक नहीं कर सकते हैं।

गूगल मैप्स के इस कदम से अब यूजर्स को उबर राउड बुक करने के लिए उबर एप को इंस्टाल करना पड़ेगा, जिसकी आक्रामक लोकेशन ट्रैकिंग को लेकर आलोचना होती रही है।

--आईएएनएस

07:10 PM
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